बताया गया है कि नीमच के चीताखेड़ा औद्योगिक पार्क और मंदसौर के बसई औद्योगिक पार्क से संबंधित परियोजनाओं में टेंडर आवंटन के बाद भी काम आगे बढ़ाने की जरूरी प्रक्रियाओं में देरी हुई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में छह महीने से एक वर्ष तक सीमांकन और अन्य स्वीकृतियां लंबित रहीं। इसके चलते निर्माण एजेंसियों के काम की गति प्रभावित हुई और साइट पर गतिविधियां रुकने की स्थिति बनी।
मामले में विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में यह भी कहा गया है कि कथित अवैध राशि या कमीशन की मांग पूरी नहीं होने के कारण कुछ फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच के स्तर पर होना बाकी है।
निर्माण एजेंसियों की ओर से यह मामला मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव कार्यालय तक पहुंचाया गया है। शिकायत में टेंडर आवंटन के बाद काम से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को रोके जाने और रनिंग बिलों के भुगतान में देरी का मुद्दा भी उठाया गया है। एजेंसियों का कहना है कि भुगतान अटकने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हुई और परियोजनाओं की प्रगति पर सीधा असर पड़ा।
मामला सामने आने के बाद MPIDC के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला की ओर से दो अटकी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है, लेकिन पहले हो चुकी देरी के कारण निर्धारित समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं।
सिंहस्थ 2028 के लिए उज्जैन में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास से जुड़े काम किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी परियोजना में लंबे समय तक देरी होने का असर आगे की समयसीमा पर पड़ सकता है। निर्माण कार्यों में देरी के कारण लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका प्रभाव अंततः परियोजना के बजट पर पड़ सकता है।
शिकायत में पर्यावरण से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। निर्माण और पौधरोपण जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त मौसम निकल जाने की स्थिति में संबंधित गतिविधियों की समयसीमा प्रभावित हो सकती है। मानसून के दौरान किए जाने वाले कार्यों में देरी होने पर आगे की योजना और संसाधन प्रबंधन पर भी दबाव बढ़ सकता है।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर है। यदि जांच में प्रशासनिक स्तर पर जानबूझकर देरी, नियमों की अनदेखी या किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर, यदि देरी प्रक्रिया संबंधी कारणों से हुई है तो विभाग को उसका स्पष्ट कारण सामने रखना होगा।
सिंहस्थ 2028 मध्य प्रदेश के लिए धार्मिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से बड़ा आयोजन है। इसलिए इससे जुड़ी परियोजनाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही महत्वपूर्ण है। फिलहाल शिकायतों के बाद अटकी परियोजनाओं को गति देने के प्रयास शुरू हुए हैं और आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
