प्रस्तावित संयुक्त संसदीय समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल होंगे। समिति को विधेयक के प्रावधानों की विस्तार से जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही उसे शीतकालीन सत्र 2026 के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपनी होगी।
सरकार की ओर से विधेयक को जेपीसी में भेजे जाने के बाद अब इसके प्रावधानों पर विस्तृत विचार की प्रक्रिया शुरू होगी। समिति विभिन्न पक्षों से जुड़े मुद्दों और विधेयक के संभावित प्रभावों का अध्ययन कर सकती है। इसके बाद उसकी रिपोर्ट के आधार पर विधेयक को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तय होगी।
वहीं विपक्ष ने इस विधेयक की जरूरत और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि प्रस्तावित बदलावों का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समुदायों और गैर सरकारी संगठनों पर दबाव बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। विपक्ष ने सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग भी उठाई।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि FCRA विधेयक लाने का उद्देश्य अल्पसंख्यकों को दबाना और सरकार के राजनीतिक हितों को साधना है। उन्होंने विधेयक की जरूरत और इसके पीछे बताई जा रही वजहों पर सवाल खड़े किए।
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने विधेयक को जेपीसी में भेजे जाने को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि समिति के स्तर पर उन प्रावधानों पर चर्चा हो सकती है जिनका असर संस्थाओं और उनके जमीनी कामकाज पर पड़ सकता है। उन्होंने गैर सरकारी संगठनों के कामकाज और उनके सामने आने वाली चुनौतियों का मुद्दा भी उठाया।
विपक्ष की ओर से यह भी कहा गया कि शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले NGO को कई बार ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जब वे सरकार की नीतियों के अनुरूप काम नहीं करते। विपक्ष का दावा है कि ऐसे संगठनों के लिए नियमों में बदलाव का प्रभाव महत्वपूर्ण हो सकता है।
इस बीच कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और विदेश नीति को लेकर सरकार पर अलग मुद्दे पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यापार समझौतों में देश और किसानों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो रही है और कुछ बड़े कारोबारी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
FCRA विधेयक को जेपीसी के पास भेजे जाने से अब इसके प्रावधानों की संसदीय जांच का रास्ता खुल गया है। समिति की रिपोर्ट आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के आखिरी दिन तक अपेक्षित है। इसके बाद विधेयक के भविष्य और सरकार की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदम पर नजर रहेगी। इस पूरी प्रक्रिया में सरकार के तर्क और विपक्ष की आपत्तियों के बीच समिति की समीक्षा अहम भूमिका निभाएगी।
