नई दिल्ली ।समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में विपक्ष के सवालों का जवाब देने संबंधी बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बुधवार को सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की ओर से जवाब देने के लिए समय सीमा तय करना अपने आप में अलोकतांत्रिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक जवाब देने के बजाय सत्र समाप्त करने की जल्दबाजी में है।
अमित शाह ने कहा था कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े विषय पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह संसद में उठाए जाने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है और चर्चा के दौरान स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि संसद में जवाब देने के लिए सरकार द्वारा समय-सीमा तय करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार जवाब केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उसमें सरकार की जिम्मेदारी और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि सरकार जिस समय सीमा में जवाब देने की बात कर रही है, वह वास्तविक उत्तर देने के बजाय एक बयान तक सीमित रह सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी नहीं चाहती कि विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब दिया जाए और वह संसद के मौजूदा सत्र को समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
समाजवादी पार्टी प्रमुख ने अपने बयान में जिम्मेदारी और जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसी सरकार की जवाबदेही समय की शर्त से नहीं, बल्कि उसके उत्तरदायित्व और तर्क से तय होती है। उन्होंने छात्र आंदोलन से जुड़े पूरे मामले को गंभीर बताते हुए विस्तृत जवाब की मांग दोहराई।
दरअसल, 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से सवाल कर रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने पैलेट गन और कील लगी लाठियों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता सरकार से स्पष्टीकरण की मांग कर चुके हैं।
विपक्ष की ओर से इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा जा रहा है। इसी बीच सरकार की ओर से संसद में चर्चा और जवाब देने की बात कही गई है। अमित शाह ने संकेत दिया है कि यदि विपक्ष छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार होता है तो वह सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
संसद के मौजूदा मानसून सत्र की निर्धारित अवधि 13 अगस्त तक है। ऐसे में विपक्ष के सवालों और सरकार के जवाब को लेकर समय को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, सदन की कार्यवाही की आवश्यकता होने पर समय सीमा बढ़ाए जाने की संभावना की भी चर्चा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अखिलेश यादव का बयान विपक्ष की ओर से सरकार पर बढ़ते दबाव को दर्शाता है। वहीं, सरकार का कहना है कि वह छात्र आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संसद में इस मुद्दे पर चर्चा होती है या नहीं और अमित शाह विपक्ष के आरोपों पर किस तरह जवाब देते हैं।
