विवाद की सुनवाई तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल करेगा। इसमें कोस्टा रिका की डियाला जिमेनेज को दोनों पक्षों की सहमति से अध्यक्ष चुना गया है। ओशचाडबैंक ने ग्रीस के स्टावरोस ब्रेकोलाकिस को अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है, जबकि रूस की ओर से पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को चुना गया है। इस नियुक्ति के साथ अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में भारत के पूर्व शीर्ष न्यायिक अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
ओशचाडबैंक यूक्रेन का सरकारी स्वामित्व वाला प्रमुख बैंक है। बैंक का आरोप है कि वर्ष 2022 के बाद रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और कारोबार को नुकसान पहुंचा। बैंक इसी नुकसान के लिए रूस से मुआवजे की मांग कर रहा है। विवाद के समाधान के लिए बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को औपचारिक विवाद नोटिस भेजा था।
बताया गया है कि रूस की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद ओशचाडबैंक ने अप्रैल 2026 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद मामले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब दोनों पक्षों ने अपने-अपने आर्बिट्रेटर नियुक्त कर दिए हैं और अध्यक्ष के तौर पर डियाला जिमेनेज की नियुक्ति पर सहमति बनी है।
पूर्व CJI चंद्रचूड़ की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रूस इससे पहले भी उन्हें दो अन्य निवेश विवादों में आर्बिट्रेटर बनाने का प्रस्ताव दे चुका था। हालांकि, उन प्रस्तावों को उन्होंने स्वीकार नहीं किया था। इस बार उन्होंने रूस की ओर से इस मामले में आर्बिट्रेटर की भूमिका स्वीकार की है।
यह विवाद ओशचाडबैंक और रूस के बीच पहले हुए क्रीमिया से जुड़े मामले से अलग है। क्रीमिया में बैंक की संपत्तियों से संबंधित पुराने विवाद में ओशचाडबैंक को करीब 1.1 अरब डॉलर का मुआवजा मिला था। मौजूदा मामला वर्ष 2022 के बाद डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया में कथित नुकसान से संबंधित है।
अंतरराष्ट्रीय निवेश मध्यस्थता में आर्बिट्रेटर की भूमिका किसी पक्ष की ओर से मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश जैसी नहीं होती, बल्कि वह संबंधित ट्रिब्यूनल का सदस्य होता है और विवाद के कानूनी तथा तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार करता है। इस मामले में भी तीनों सदस्य मिलकर संबंधित दावों, आपत्तियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेंगे।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी व्यापक संघर्ष की पृष्ठभूमि में यह निवेश विवाद अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओशचाडबैंक जिन संपत्तियों और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचने का दावा कर रहा है, उनके आधार पर मुआवजे की मांग की गई है। अब ट्रिब्यूनल दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए मामले में आगे की कार्यवाही करेगा।
