कंपनी ने अपने पत्र में कहा है कि सड़क प्रतिबंधों और सुरक्षा कारणों से कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो रिफाइनरी का संचालन बंद करना पड़ सकता है, जिससे देश में ईंधन आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
चिट्ठी के अनुसार, रावलपिंडी और आसपास के क्षेत्रों में लागू यातायात नियंत्रण और सड़क बंदी के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। बड़ी संख्या में टैंकर शहर की सीमाओं में फंसे हुए हैं, जिससे रिफाइनरी तक कच्चे तेल की आपूर्ति में लगभग 35 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी ने सरकार से तेल टैंकरों को तत्काल यातायात प्रतिबंधों से छूट देने की मांग की है, ताकि कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
पत्र में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो मुख्य कच्चा तेल प्रसंस्करण इकाई को बंद करना पड़ सकता है। इसका असर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति पर पड़ेगा, जिससे हवाई अड्डों, रक्षा प्रतिष्ठानों और बिजली उत्पादन इकाइयों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह पत्र पिछले महीने लिखा गया था, लेकिन रावलपिंडी क्षेत्र में हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक अस्थिरता और ऊर्जा निर्भरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। उनका मानना है कि यदि रिफाइनिंग और ईंधन आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इसका सीधा असर परिवहन, बिजली उत्पादन और सैन्य लॉजिस्टिक्स पर पड़ सकता है।
