यश ने बताया कि स्कूल के दिनों में उन्हें अपने और दूसरे बच्चों के बीच आर्थिक स्थिति का अंतर ज्यादा महसूस नहीं होता था। असली बदलाव कॉलेज पहुंचने के बाद नजर आया। वहां उनके कई दोस्तों के पास बाइक और कारें थीं। उनके पास परिवार का पुराना स्कूटर था। उस उम्र में जब हर युवा अपने दोस्तों के बीच बेहतर दिखना चाहता है तब यश को अपने साधारण साधनों को लेकर झिझक होने लगी थी।
इसी दौर में उन्होंने परिवार की मदद के लिए किराने की दुकान भी शुरू की। यश के मुताबिक कई बार दुकान के लिए सामान लाने के लिए उन्हें उसी पुराने स्कूटर पर जाना पड़ता था। उन्हें डर रहता था कि कहीं उनके दोस्त उन्हें इस तरह न देख लें। वह दौर उनके लिए आर्थिक संघर्ष के साथ साथ मानसिक दबाव वाला भी था। आज जिस अभिनेता की फिल्मों और लाइफस्टाइल की चर्चा होती है उसके पीछे संघर्ष और असुरक्षा से भरा वह दौर भी रहा है।
यश ने अपने माता पिता के योगदान को भी बेहद अहम बताया। उनके मुताबिक परिवार भले ही उनके लिए बड़ी संपत्ति नहीं बना पाया लेकिन माता पिता ने उन्हें जिंदगी के जरूरी सबक दिए और हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया। यही भरोसा आगे चलकर उनके आत्मविश्वास की ताकत बना। यश की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी व्यक्ति की शुरुआती आर्थिक स्थिति उसकी मंजिल तय नहीं करती। लगातार मेहनत और सही मौके के साथ परिस्थितियां बदली जा सकती हैं।
यश की पहचान धीरे धीरे कन्नड़ सिनेमा से निकलकर पूरे देश में बनी। केजीएफ और केजीएफ चैप्टर 2 की सफलता ने उन्हें पैन इंडिया स्टार बना दिया। इसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। अब उनकी अगली बड़ी फिल्म टॉक्सिक को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। फिल्म में यश के साथ नयनतारा कियारा आडवाणी हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है और यह 26 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।
टॉक्सिक की रिलीज से पहले यश लगातार प्रमोशन में व्यस्त हैं। फिल्म की एडवांस बुकिंग भी शुरू हो चुकी है और इसे बड़े स्तर पर रिलीज करने की तैयारी है। ऐसे समय में अभिनेता का अपने संघर्ष के दिनों को याद करना उनके प्रशंसकों के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि यह दिखाता है कि आज का रॉकी भाई कभी बेहद सामान्य परिस्थितियों से निकलकर अपने सपनों को पूरा करने की कोशिश कर रहा था। यश की कहानी बताती है कि सफलता के चमकदार मुकाम के पीछे अक्सर ऐसे दौर छिपे होते हैं जिनमें व्यक्ति को खुद पर भरोसा बनाए रखने के लिए सबसे ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है।
