यह पहली बार नहीं है जब संजय दत्त अपने शब्दों को लेकर विवादों में आए हों। सितंबर 2026 में महाराष्ट्र के एक कार्यक्रम के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने को कहा था। इस पर संजय दत्त ने मजाकिया अंदाज में अपनी येरवडा जेल की सजा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जेल में भी मराठी नहीं सीखी। वीडियो सामने आने के बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई। मामला बढ़ने पर प्रताप सरनाईक ने बताया कि अभिनेता ने फोन करके स्पष्टीकरण दिया और कहा कि अगर उनके मजाक से कोई गलत संदेश गया हो तो वह माफी मांगते हैं। इससे पहले 2017 में फिल्म ‘भूमि’ के प्रमोशन के दौरान बेटी त्रिशाला दत्त को लेकर भी उन्होंने ऐसी टिप्पणी की थी, जिस पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा था कि अगर त्रिशाला फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहती हैं तो उन्हें हिंदी भी सीखनी होगी। इसी बातचीत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि त्रिशाला अभिनेत्री बनना चाहती थीं और वह उनकी टांगें तोड़ देना चाहते थे।
साल 2012 में अमीषा पटेल से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में रहा। एक समारोह में संजय दत्त ने उनके पहनावे को बहुत रिवीलिंग माना और उनसे कपड़े ढकने के लिए कहा। बाद में उनके दुपट्टे से उनका शरीर ढक दिया। इस पर सफाई देते हुए दत्त की तरफ से कहा गया कि वह अमीषा को बहन की तरह मानते हैं और इसी भावना से उन्होंने ऐसा किया था। 2007 में ‘कॉफी विद करण’ के दौरान महिलाओं के साथ संबंधों की संख्या को लेकर दिया गया उनका जवाब भी काफी चर्चित हुआ था। जब उनसे 50, 100, 150, 200 या उससे ज्यादा का विकल्प पूछा गया तो उन्होंने ‘ज्यादा’ कहा था। इसके बाद तीन इच्छाओं के सवाल पर उन्होंने पैसा, आजादी और महिलाएं बताई थीं। 2018 में फिल्म ‘संजू’ में भी उनकी जिंदगी से जुड़ी महिलाओं की संख्या का संदर्भ आया, जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी को लेकर बहस हुई।
साल 2009 में प्रतापगढ़ में समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में दी गई संजय दत्त की स्पीच भी विवादों में रही थी। तत्कालीन बसपा सरकार के दौर में सपा उम्मीदवार अक्षय प्रताप के समर्थन में सभा के दौरान उन्होंने जनता को ‘जादू की झप्पी’ देने की बात कही थी और कहा था कि मौका मिलने पर वह मायावती को भी ऐसा उपहार देना चाहेंगे। इस बयान पर बवाल हुआ और अभिनेता पर महिला को लेकर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा। इसके अलावा 1993 के मुंबई बम धमाका मामले के दौरान उनके पिता सुनील दत्त से हुई बातचीत का भी जिक्र मिलता है। संजय दत्त के मुताबिक, पुलिस के सामने हथियार रखने की बात स्वीकार करने के बाद उन्होंने पिता से कहा था कि उनकी रगों में मुस्लिम खून है और वह शहर में हो रही घटनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सके। यह सुनकर सुनील दत्त बेहद परेशान हुए थे।
विवादित बयानों के मामले में संजय दत्त अकेले बॉलीवुड अभिनेता नहीं हैं। आमिर खान ने 2015 में देश में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर अपनी पत्नी किरण राव की चिंता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि किरण ने भारत छोड़ने की बात तक पूछी थी और उन्हें अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर डर लगता था। इसके बाद आमिर की काफी आलोचना हुई और उन्हें देशद्रोही तक कहा गया। इसी साल शाहरुख खान ने भी असहिष्णुता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और धार्मिक असहिष्णुता सबसे बड़ा अपराध है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल हुआ और उन्हें पाकिस्तान चले जाने जैसी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। बाद में शाहरुख ने कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। 2018 में नसीरुद्दीन शाह ने अपने बच्चों को लेकर चिंता जताते हुए धर्म और भीड़ हिंसा से जुड़ी टिप्पणी की थी, जिसके बाद उनकी भी आलोचना हुई थी।
