विक्रमादित्य ने बताया कि उनके पिता का पहला सपना अभिनेता बनना नहीं था। वह बचपन से सेना में जाने की इच्छा रखते थे। उनके दादा भी सैनिक थे और इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि का प्रभाव प्रदीप रावत के मन पर पड़ा था। हालांकि, परिस्थितियों के चलते वह सेना में शामिल नहीं हो सके और आगे चलकर उनका जीवन अभिनय की दुनिया की ओर मुड़ गया।
विक्रमादित्य के मुताबिक, अभिनय उनके पिता के जीवन में एक ऐसे मोड़ के रूप में आया, जिसने आगे चलकर उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। उन्होंने अपने काम के जरिए हिंदी सिनेमा के साथ दक्षिण भारतीय फिल्मों और टेलीविजन में भी मजबूत जगह बनाई। अलग-अलग तरह के किरदारों को प्रभावशाली ढंग से निभाने की उनकी क्षमता दर्शकों के बीच उनकी खास पहचान बनी।
प्रदीप रावत को बीआर चोपड़ा के लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में अश्वत्थामा के किरदार से घर-घर में पहचान मिली। इस भूमिका ने उनके अभिनय करियर को एक मजबूत आधार दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में भी कई महत्वपूर्ण और प्रभावशाली भूमिकाएं निभाईं। आमिर खान की फिल्म गजनी में उनका किरदार विशेष रूप से चर्चित रहा और इस भूमिका ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उन्हें पहचान दिलाई।
विक्रमादित्य ने अपने पिता के व्यक्तित्व की एक और खास बात साझा करते हुए कहा कि वह बेहद आत्मनिर्भर स्वभाव के व्यक्ति थे। वह मुश्किल परिस्थितियों में भी दूसरों से मदद मांगने के बजाय अपनी मेहनत और क्षमता पर भरोसा करते थे। उनके लिए आत्मसम्मान और खुद के दम पर आगे बढ़ना जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा मेहनत करने और ईश्वर पर विश्वास रखने की बात कहते थे। उनका मानना था कि इंसान के हाथ में केवल अपना प्रयास होता है, जबकि परिणाम हमेशा उसके नियंत्रण में नहीं होता। इसलिए व्यक्ति को ईमानदारी से अपना काम करते रहना चाहिए और इसके बाद मिलने वाले परिणाम को स्वीकार करना चाहिए। यही सोच उनके जीवन और व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण हिस्सा रही।
विक्रमादित्य ने यह भी बताया कि उनके पिता की एक बड़ी इच्छा थी कि वह अपने बेटे को फिल्मी दुनिया में एक सफल कलाकार के रूप में देखें। प्रदीप रावत चाहते थे कि उनका बेटा भी अभिनय के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाए और बड़ा नाम हासिल करे। अब विक्रमादित्य ने पिता के इस सपने को पूरा करने का संकल्प जताया है।
प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वह बीमारी का इलाज करा रहे थे और उनके जीवन के अंतिम दौर में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ गई थीं। उनके निधन के बाद बेटे द्वारा साझा की गई यादों ने उनके प्रशंसकों को उनके अभिनय के साथ-साथ उनके निजी व्यक्तित्व और जीवन मूल्यों को भी करीब से समझने का अवसर दिया है।
