इस नए सीजन की मुख्य थीम ‘सोचना पड़ेगा’ रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि जानकारी के इस दौर में ज्ञान के सही इस्तेमाल और सोच का महत्व सबसे अधिक है। निर्देशक के अनुसार, इस बार फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड में भी ट्विस्ट लाया गया है ताकि हॉट सीट तक पहुंचने का रास्ता पहले से थोड़ा सहज हो सके। हालांकि, मुख्य खेल में प्रवेश करने के बाद प्रतियोगियों को मिलने वाली लाइफलाइन्स पाने के लिए भी प्रतिस्पर्धा करनी होगी और उन्हें हासिल करना पड़ेगा।
नियमों में बदलाव के बावजूद शो के मूल स्वरूप से कोई समझौता नहीं किया गया है। प्रतिभागियों के सामने पहले की तरह ही 16 सवाल रखे जाएंगे और अंतिम प्रश्न की धनराशि 7 करोड़ रुपये ही बनी रहेगी। शो में पहुंचने वाले प्रतियोगियों का चयन कई कठिन चरणों, लिखित परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के परीक्षण के बाद किया जाता है, जिससे केवल योग्य और प्रतिभाशाली लोग ही मुख्य मंच तक पहुंच पाते हैं।
मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों और कस्बों से भी हर साल कई मेधावी प्रतियोगी अपनी प्रतिभा और ज्ञान के बल पर इस मंच तक पहुंचते रहे हैं। राज्य के युवाओं और छात्र-छात्राओं के बीच इस कार्यक्रम का खासा प्रभाव देखने को मिलता है, जहां लोग इसे न केवल मनोरंजन बल्कि प्रेरणा और ज्ञानवर्धन के एक प्रमुख माध्यम के रूप में देखते हैं।
शो के निर्देशक ने अमिताभ बच्चन के समर्पण और कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें इस कार्यक्रम की वास्तविक आत्मा करार दिया। उन्होंने बताया कि शो की शुरुआत और अंत के अलावा अधिकांश बातचीत पूरी तरह से स्वाभाविक होती है। अमिताभ बच्चन प्रत्येक प्रतियोगी की पृष्ठभूमि को समझते हैं और उनके साथ संवेदनशीलता से संवाद स्थापित करते हैं, जिससे प्रतिभागियों को सहज महसूस होता है।
डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ अपनी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सफल रहा है। हर नए सीजन के साथ इसमें किए जाने वाले बदलाव नई पीढ़ी को जोड़ने के साथ-साथ पुराने दर्शकों के अनुभव को भी नयापन प्रदान करते हैं।
