नई दिल्ली । चित्रकूट के जानकीकुंड स्थित सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय में सोमवार से विजन सेंटर प्रबंधन और परियोजना क्रियान्वयन विषय पर चार दिवसीय कार्यशाला की शुरुआत हुई। 10 से 13 अगस्त तक चलने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित समुदायों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाना और विजन सेंटरों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी करना है।
कार्यशाला का आयोजन सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय की ओर से ऑर्बिस इंटरनेशनल के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन कार्यक्रम से पहले देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे प्रतिभागियों ने पद्मश्री डॉ. बीके जैन को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के निदेशक एवं कार्यकारी न्यासी डॉ. इलेश जैन ने प्रतिभागियों और विशेषज्ञों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण और सुलभ नेत्र सेवाएं पहुंचाने में विजन सेंटरों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्तर पर समय पर दृष्टि जांच और मरीजों को उचित उपचार तक पहुंचाना इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है।
ऑर्बिस इंटरनेशनल के कंट्री डायरेक्टर डॉ. ऋषि राज बोराह ने विजन सेंटरों को समुदाय और उच्च स्तरीय नेत्र चिकित्सा सेवाओं के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने समय पर जांच, उपचार के लिए रेफरल और मरीजों के फॉलोअप की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
चार दिवसीय कार्यशाला में विजन सेंटर स्थापित करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ जानकारी दी जा रही है। इसमें क्षेत्र की जरूरत का आकलन, सेंटर के लिए स्थान का चयन, आधारभूत सुविधाएं, आवश्यक उपकरण, मानव संसाधन, सेवा की गुणवत्ता और समुदाय की भागीदारी जैसे विषय शामिल हैं।
कार्यशाला के दौरान मरीजों की स्क्रीनिंग और रेफरल प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर भी विशेष चर्चा हो रही है। इसके साथ ही एमआईएस और डेटा प्रबंधन तथा टेली-ऑप्थल्मोलॉजी के उपयोग से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विशेषज्ञ प्रतिभागियों के साथ जानकारी साझा कर रहे हैं।
कार्यक्रम में परियोजना प्रबंधक, आउटरीच समन्वयक, विजन सेंटर प्रभारी और नेत्र स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय वर्तमान में 130 से अधिक विजन सेंटरों के माध्यम से ग्रामीण और वंचित समुदायों तक नेत्र सेवाएं पहुंचाने का काम कर रहा है।
कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य विजन सेंटरों को केवल प्राथमिक जांच तक सीमित रखने के बजाय उन्हें प्रभावी रेफरल केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे ऐसे मरीजों की पहचान और समय पर उच्च स्तरीय उपचार केंद्र तक पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है, जिन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा की जरूरत है।
प्रतिभागियों को विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ समूह अभ्यास, केस स्टडी और समस्या समाधान आधारित गतिविधियों में शामिल किया जा रहा है। अलग-अलग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर भी मिल रहा है, ताकि सफल कार्यप्रणालियों को अन्य केंद्रों में लागू किया जा सके।
चार दिवसीय कार्यक्रम के समापन पर कार्यशाला से मिली प्रमुख सीख और अनुभवों को संकलित किया जाएगा। इसके आधार पर नेत्र सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसका लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर जांच, उचित रेफरल और उपचार के बाद मरीजों के फॉलोअप की व्यवस्था को मजबूत करना है।
