5 अक्टूबर को बाजार खुलने से पहले निवेशकों के सामने कई बड़े संकेत मौजूद हैं। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार की धारणा पर दबाव बना रही है। इसके अलावा कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। सितंबर के डेरिवेटिव कारोबार में निफ्टी में करीब 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और बाजार में तेजी वाले दांव कमजोर हुए हैं। ऐसे माहौल में सोमवार को शुरुआती कारोबार में उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
तकनीकी स्तरों की बात करें तो बाजार विशेषज्ञों की नजर निफ्टी के 22000 से 22200 के क्षेत्र पर रहेगी। इसे महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है। वहीं 22500 से 22600 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस के तौर पर देखा जा रहा है। अगर निफ्टी इन स्तरों के ऊपर मजबूती कायम करता है तो बाजार में कुछ राहत की उम्मीद बन सकती है। दूसरी तरफ कमजोरी बढ़ने पर 22000 के आसपास का क्षेत्र महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अक्टूबर का पहला सप्ताह शेयर बाजार के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर तक चलेगी और 7 अक्टूबर को नीतिगत फैसले की घोषणा होगी। इसके अलावा कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों का सीजन भी शुरू होने वाला है। TCS 8 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। इन घटनाओं का असर बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।
बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने भारतीय शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिल रहा है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे किसी एक दिन की तेजी या गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला न लें।
कुल मिलाकर 5 अक्टूबर को बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर निफ्टी के अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तरों के साथ कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों बॉन्ड यील्ड RBI की बैठक और आगामी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। मौजूदा माहौल में जोखिम को समझकर और अपनी निवेश रणनीति के अनुसार ही कदम उठाना बेहतर रहेगा। यह जानकारी बाजार विश्लेषण के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
