सोमवार व्रत की पूजा में भगवान शिव को जल अर्पित करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। शिवलिंग पर स्वच्छ जल चढ़ाने के बाद दूध दही शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा आक के फूल और सफेद फूल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखें कि वह साफ और साबुत हो। भगवान शिव को चंदन अक्षत और भस्म भी अर्पित की जा सकती है। पूजा के दौरान ऊं नमः शिवाय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र या शिव चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं।
सोमवार व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना से दांपत्य जीवन में प्रेम और सुख बढ़ता है। अविवाहित युवक और युवतियां मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा से सोमवार का व्रत करते हैं। पूजा के बाद भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए श्रद्धा से प्रार्थना करें। व्रत रखने वाले लोग अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। कुछ भक्त पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ लोग फल दूध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
सोमवार के दिन केवल पूजा पाठ करना ही नहीं बल्कि अपने आचरण को भी सात्विक रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन क्रोध विवाद और किसी के प्रति अपशब्द कहने से बचना चाहिए। जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या अपनी क्षमता के अनुसार दान देना भी शुभ माना जाता है। शाम के समय भगवान शिव की दोबारा पूजा करके आरती की जा सकती है। व्रत का पारण अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यता के अनुसार पूजा के बाद किया जाता है।
सोमवार व्रत की सबसे बड़ी विशेषता श्रद्धा और संयम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। इसलिए व्रत के दौरान मन को शांत रखें और भगवान शिव का ध्यान करें। पूजा की विधि में क्षेत्रीय और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर कठिन उपवास रखने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन करना उचित है। धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं।
