स्मार्ट मीटरिंग और ग्रिड मॉडर्नाइजेशन को लेकर सरकार की योजनाओं के तहत बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है। रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत करोड़ों स्मार्ट मीटर लगाने की योजना है, लेकिन अभी तक इसका बड़ा हिस्सा लागू होना बाकी है। यही कारण है कि इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों की ऑर्डर बुक तेजी से बढ़ रही है और निवेशकों की नजर भी इन पर लगातार बनी हुई है।
Hitachi Energy, ABB India, Siemens Energy और Genus Power जैसी कंपनियां इस पूरे इकोसिस्टम में प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभर रही हैं। इन कंपनियों को लगातार बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, खासकर ग्रिड ऑटोमेशन, हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट सिस्टम और स्मार्ट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स में। हालांकि केवल ऑर्डर मिलना ही सफलता की गारंटी नहीं माना जा रहा है, क्योंकि असली चुनौती इन प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने और उन्हें रेवेन्यू में बदलने की होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में स्मार्ट मीटरिंग का लक्ष्य बेहद बड़ा है, लेकिन अभी तक इंस्टॉलेशन की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है। करोड़ों मीटर लगाने की योजना के मुकाबले वास्तविक इंस्टॉलेशन का आंकड़ा काफी कम है, जिससे यह साफ है कि आने वाले वर्षों में इस सेक्टर में काम की संभावनाएं काफी ज्यादा हैं। इसी वजह से कंपनियों के बीच इस बाजार को पकड़ने की दौड़ और तेज हो गई है।
इस पूरे सेक्टर की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन भी है। बिजली ग्रिड को न केवल मजबूत बनाना होता है, बल्कि उसे रियल टाइम मॉनिटरिंग, कम लॉस और बेहतर स्टेबिलिटी के साथ चलाना भी जरूरी है। इसके अलावा बिजली चोरी को रोकना और वितरण प्रणाली को अधिक कुशल बनाना भी इस बदलाव का अहम हिस्सा है।
