सबसे अधिक दबाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान टीसीएस का शेयर करीब 5.9 प्रतिशत तक टूटकर 2,300.10 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह लगभग 4.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,328 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।
टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में भी करीब चार प्रतिशत तक कमजोरी रही। सत्र के दौरान यह 334.20 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया, जो लगभग 3.85 प्रतिशत की गिरावट थी। टाटा स्टील के शेयर भी दो प्रतिशत से अधिक फिसले और एक समय 2.4 प्रतिशत गिरकर 183.60 रुपये के स्तर तक पहुंच गए।
टाइटन के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली और यह करीब 2.65 प्रतिशत गिरकर 4,992 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर भी लगभग दो प्रतिशत कमजोर रहे। समूह की अन्य कंपनियों में टाटा एलेक्सी, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा पावर और ट्रेंट के शेयरों में भी करीब दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार से जुड़े शेयर, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और तेजस नेटवर्क्स भी दबाव में रहे। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ कुछ कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर से सुधार देखने को मिला। दूसरी ओर टाटा केमिकल्स ने इस कमजोर माहौल में मजबूती दिखाई और उसके शेयरों में करीब दो प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। हालांकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उनका यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक से पहले सामने आया है।
इस घोषणा के साथ टाटा समूह में करीब नौ वर्षों से चले आ रहे चंद्रशेखरन के शीर्ष नेतृत्व के अगले वर्ष समाप्त होने की स्थिति स्पष्ट हो गई है। चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और करीब तीन दशक तक टीसीएस में विभिन्न भूमिकाओं में काम किया। वर्ष 2009 में वह टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया।
टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। समूह की विभिन्न कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, धातु, ऊर्जा, विमानन और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में कारोबार करती हैं। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाइटन जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन पर समूह के नेतृत्व से जुड़े फैसलों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।
अब बाजार की नजर टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पर रहेगी। निवेशक यह भी देखेंगे कि नया नेतृत्व समूह की मौजूदा कारोबारी रणनीति, निवेश प्राथमिकताओं और विभिन्न कंपनियों के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाता है। फिलहाल चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े इस फैसले ने टाटा समूह के शेयरों में निकट अवधि की अनिश्चितता बढ़ा दी है।
