नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बाँदा में तिंदवारी रोड स्थित एक होटल में प्रोफेसर (डॉ.) अश्विनीकुमार शुक्ल की सेवानिवृत्ति के अवसर पर “46 वर्षों बाद : अंत नहीं आरंभ” शीर्षक से संस्मरणात्मक चर्चा एवं अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, सैन्य अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा सामाजिक क्षेत्र की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लेकर डॉ. शुक्ल के लंबे, अनुशासित और प्रेरणादायी जीवन सफर को सम्मान दिया। कार्यक्रम का आयोजन उनके सुपुत्र इंजीनियर आशुतोष शुक्ल द्वारा किया गया।
समारोह में वक्ताओं ने डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उन्हें एक आदर्श शिक्षक, साहित्यकार, संपादक और अनुशासनप्रिय व्यक्तित्व बताया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रोफेसर डॉ. कौशलनाथ उपाध्याय ने उनके साहित्यिक योगदान, भाषा पर मजबूत पकड़, संपादन कौशल और शिक्षा जगत में उनके उल्लेखनीय कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि डॉ. शुक्ल ने अपने कार्यों से विद्यार्थियों और समाज दोनों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
समारोह की अध्यक्षता कर रहे कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. जगन्नाथ पाठक ने डॉ. शुक्ल की विद्वता, सामाजिक सरोकारों और संगठनात्मक क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर डॉ. सुरेश माहेश्वरी ने उनके साथ बिताए साहित्यिक और शैक्षणिक अनुभव साझा करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया।
कार्यक्रम का सबसे आकर्षक क्षण डॉ. शुक्ल के 46 वर्षों के जीवन और कार्यों पर आधारित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन रहा। इस प्रस्तुति में उनके सैन्य जीवन से लेकर शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में किए गए योगदान को भावनात्मक और प्रेरक ढंग से प्रस्तुत किया गया। उपस्थित अतिथियों ने वृत्तचित्र की सराहना करते हुए इसे उनके जीवन की उपलब्धियों का सजीव दस्तावेज बताया।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मंच संचालन का दायित्व अरुणकुमार तिवारी और मनोजकुमार ‘मृदुल’ ने संयुक्त रूप से निभाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने डॉ. शुक्ल के साथ जुड़े अपने अनुभव साझा किए और उनके व्यक्तित्व की सादगी, अनुशासन तथा समाज के प्रति समर्पण को याद किया।
डॉ. अश्विनीकुमार शुक्ल ने युवावस्था में भारतीय वायुसेना के माध्यम से राष्ट्रसेवा की शुरुआत की थी। लंबे सैन्य कार्यकाल के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश कर शिक्षण, शोध और साहित्य सृजन को अपना जीवन समर्पित किया। उनके इस बहुआयामी सफर को समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों ने प्रेरणादायी बताया और भविष्य में भी उनके अनुभव तथा मार्गदर्शन से समाज को लाभ मिलने की आशा व्यक्त की।
समारोह में उनके सैन्य जीवन के पुराने साथियों, शिक्षण संस्थानों के प्राध्यापकों, साहित्यकारों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आत्मीय वातावरण में आयोजित यह समारोह सम्मान, स्मृतियों और प्रेरणा का यादगार अवसर बन गया।
