पीयूष गोयल ने आंध्र प्रदेश के एक्वाकल्चर और तंबाकू उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक चर्चा के दौरान क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसे समाधान तलाश रही है, जिनसे उत्पादन क्षमता बढ़े, निर्यात को प्रोत्साहन मिले और किसानों को बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हों। उनका कहना था कि एक्वाकल्चर भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख एक्वाकल्चर उत्पादक राज्यों में शामिल है और भारतीय सीफूड निर्यात में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस क्षेत्र को मजबूत करना केवल राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और निर्यात वृद्धि के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योग जगत के बीच समन्वय से इस क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।
बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, उत्पादन लागत, निर्यात संभावनाओं और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि नीतिगत सहयोग और समयबद्ध निर्णयों से किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया जा सकता है।
इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी केंद्र सरकार से एक्वाकल्चर और तंबाकू किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बढ़ती उत्पादन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए किसानों को राहत देने के उद्देश्य से आवश्यक नीतिगत कदम उठाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर एक्वाकल्चर उद्योग से जुड़ी प्रमुख आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने झींगा चारा तैयार करने वाली इकाइयों के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने, घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए फिश मील के निर्यात को विनियमित करने, तंबाकू निर्यात को प्रोत्साहन देने, एक्वाकल्चर से जुड़े प्रमुख इनपुट पर जीएसटी में राहत प्रदान करने तथा अमरावती में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना जैसे सुझाव भी रखे हैं। उनका मानना है कि इन कदमों से किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता में सुधार आएगा।
केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए राज्यों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सरकार का फोकस ऐसी नीतियों पर है, जिनसे कृषि और मत्स्य क्षेत्र दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिले। आने वाले समय में इन प्रस्तावों पर विचार के बाद संबंधित क्षेत्रों के लिए नए निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
