प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात क्षेत्र से गुजर रहे एक दमकलकर्मी की नजर दुकान से निकल रहे धुएं और आग की लपटों पर पड़ी। उन्होंने बिना समय गंवाए फायर कंट्रोल रूम को सूचना दी। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां और एक पानी का टैंकर घटनास्थल पर पहुंच गए। दमकलकर्मियों ने तत्काल राहत और बचाव अभियान शुरू किया और करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया।
दमकल विभाग की सतर्कता के कारण आग आसपास की दुकानों तक नहीं फैल सकी। जिस दुकान में आग लगी थी, उसके आसपास कपड़े और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान मौजूद थे। यदि आग पर समय रहते काबू नहीं पाया जाता तो पूरा बाजार इसकी चपेट में आ सकता था और करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका थी। दमकल कर्मियों की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया।
प्रारंभिक जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि फायर विभाग और संबंधित अधिकारी मामले की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। आग से दुकान में हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ड्राई फ्रूट्स और किराना सामान होने के कारण आग तेजी से फैली, जिससे दुकान के अंदर रखा काफी सामान प्रभावित हुआ।
फ्रीगंज क्षेत्र में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले सितंबर 2025 में घनालाल की चाल स्थित एक सूने मकान में शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लगी थी। उस हादसे में करीब आठ लाख रुपये नकद, जेवर और घरेलू सामान जलकर राख हो गया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने एक बार फिर बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा और विद्युत व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दुकानों और व्यावसायिक परिसरों में नियमित रूप से विद्युत वायरिंग की जांच, ओवरलोडिंग से बचाव और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। फायर विभाग ने भी व्यापारियों से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने बिजली के उपकरणों और वायरिंग की जांच कराएं तथा सुरक्षा मानकों का पालन करें, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
