नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के झांसी में बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग एक बार फिर तेज होती दिखाई दी। गुरुवार को बुंदेलखंड राज्य निर्माण मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर अलग राज्य की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के पदाधिकारियों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों पर बुंदेलखंड के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और सरकार से राज्य निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
मोर्चा के अध्यक्ष भानु सहाय के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता हाथों में झंडे और बैनर लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाए जाने की मांग से जुड़े नारे लगाए और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जबकि पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई।
भानु सहाय ने कहा कि बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र के सांसद और विधायक भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात नहीं रख रहे हैं। उनके अनुसार, जनप्रतिनिधियों को बुंदेलखंड के विकास और राज्य निर्माण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के दौरान विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि यदि क्षेत्र को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले तो अलग राज्य की मांग को भी नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से जुड़े प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्गठन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रदर्शन के दौरान मोर्चा अध्यक्ष ने भारतीय जनता पार्टी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड से जुड़े जनप्रतिनिधि राज्य निर्माण के मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले चुनावों में संगठन राजनीतिक स्तर पर जनता के बीच अभियान चलाएगा।
मोर्चा की ओर से यह भी कहा गया कि बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय से विकास संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहा है। अलग राज्य बनने से प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर होगी और क्षेत्रीय विकास को गति मिल सकेगी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, रोजगार और आधारभूत ढांचे जैसे क्षेत्रों में अपेक्षित प्रगति के लिए अलग राज्य की मांग लगातार उठाई जाती रही है।
फिलहाल बुंदेलखंड राज्य निर्माण का मुद्दा एक बार फिर क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। मोर्चा ने सरकार से इस मांग पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान दिए गए राजनीतिक बयानों ने भी इस मुद्दे को नई चर्चा में ला दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस मांग पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।
