इमरान मसूद ने कहा कि इस मामले में प्रारंभिक शिकायत मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई थी, जबकि आरोप भी ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों पर लगाए जा रहे हैं। ऐसे में जांच एजेंसी की भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी दिखाई देनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि जांच में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिल रहे हैं तो संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक कार्रवाई भी स्पष्ट रूप से सामने आनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक संस्था से जुड़े मामले में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि लोगों का भरोसा न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर कायम रहे। उनका कहना था कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए तथा किसी भी स्तर पर पक्षपात की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि जिन लोगों ने कभी रामलीला और कांवड़ यात्रा पर रोक लगाने का प्रयास किया, वही अब आस्था की बात कर रहे हैं। इस पर मसूद ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी रोक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि रामलीला लंबे समय से भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग सहभागिता करते आए हैं। उनके अनुसार, धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को जोड़ना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी परंपरा या आयोजन को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के आधार पर समझा जाना चाहिए। उनका मानना है कि सभी धार्मिक आयोजनों के प्रति सम्मान का भाव बना रहना चाहिए।
इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच संभावित गठबंधन को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उनके अनुसार, यदि किसी राजनीतिक गठबंधन की चर्चा हो रही है तो उसका प्रभाव केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वह राजनीतिक स्तर पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी गठबंधन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कांग्रेस संगठन को मजबूत करना है। उनके अनुसार, राजनीतिक दलों को अपने संगठनात्मक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के मुद्दों पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए। फिलहाल राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जारी है और इस पर आए राजनीतिक बयानों के बीच अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और संभावित निष्कर्षों पर बनी हुई है।
