
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में आषाढ़ी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा और पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखते हुए निःशुल्क पौध वितरण एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा के इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य एक ओर परिक्रमा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भोजन उपलब्ध कराना था, वहीं दूसरी ओर लोगों को अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देना था।
चित्रकूट में आषाढ़ी अमावस्या के अवसर पर हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कर्वी बस स्टैंड परिसर में यह आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन समाजसेवी विनोद प्रिंस केसरवानी ने जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास के सानिध्य में कराया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं को भोजन कराने के साथ-साथ निःशुल्क पौधों का वितरण भी किया गया, जिससे धार्मिक आयोजन के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की भावना को भी बढ़ावा मिल सके।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत और पौध वितरण के साथ हुआ। इस दौरान पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र, भाजपा जिलाध्यक्ष महेंद्र कोटार्य, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष हीरो मिश्रा, डॉ. रचित पांडेय, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रतिनिधि, अधिवक्ता तथा स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने सहभागिता निभाई।
आचार्य रामचंद्र दास ने इस अवसर पर कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ समाजसेवा की भावना जुड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चित्रकूट आने वाले श्रद्धालुओं को प्रवेश द्वार पर भोजन की सुविधा उपलब्ध कराना सेवा का महत्वपूर्ण कार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि आगामी समय में पूज्य गुरुदेव के जन्मोत्सव के अवसर पर जिला चिकित्सालय में दूर-दराज से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए सीता रसोई के माध्यम से अत्यंत रियायती दर पर भोजन उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की जाएगी, जिससे जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके।
उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण और शुद्ध हवा स्वस्थ जीवन की मूल आवश्यकता हैं। इसी उद्देश्य से श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के बीच पौधों का वितरण किया गया ताकि अधिक से अधिक लोग वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं। उनका कहना था कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
समाजसेवी विनोद प्रिंस केसरवानी ने कहा कि आषाढ़ी अमावस्या के अवसर पर आयोजित यह भंडारा केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि इसे नियमित सेवा अभियान के रूप में आगे भी जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक अमावस्या पर श्रद्धालुओं की सेवा के लिए इसी प्रकार का भंडारा आयोजित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही पौध वितरण अभियान भी निरंतर चलाया जाएगा ताकि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़े और अधिक से अधिक हरियाली विकसित हो सके।
धार्मिक आयोजन, समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाले इस कार्यक्रम को श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने सराहा। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया और पौधे प्राप्त कर उन्हें लगाने का संकल्प लिया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि ऐसे सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम भविष्य में भी जनसेवा तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक भूमिका निभाते रहेंगे।
