मंत्रिमंडल ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ को 1.27 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इस योजना के तहत चिप डिजाइन, विनिर्माण, कच्चे माल की आपूर्ति और संपूर्ण वैल्यू चेन को विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर उत्पादन को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और आने वाले वर्षों में देश को चिप निर्माण के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के माध्यम से बड़े निवेश और उच्च तकनीक आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है।
मोबाइल विनिर्माण को गति देने के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के दूसरे चरण को भी मंजूरी दी गई है। इस योजना पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य भारत में मोबाइल निर्माण क्षमता का विस्तार करना, निर्यात बढ़ाना, घरेलू ब्रांडों को प्रोत्साहित करना और बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराना है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित करने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वाराणसी में बढ़ती आबादी और पर्यटन गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिली है। राष्ट्रीय राजमार्गों और रिंग रोड को जोड़ने वाली इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में यातायात दबाव कम करना, आवागमन को तेज बनाना और धार्मिक पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद शहर में ट्रैफिक प्रबंधन अधिक प्रभावी होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय निवेश नीति-2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत प्राकृतिक गैस आधारित आठ से नौ नए यूरिया संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे देश में अतिरिक्त यूरिया उत्पादन क्षमता विकसित होगी। सरकार का लक्ष्य आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना और कृषि क्षेत्र की आवश्यकताओं को घरेलू उत्पादन के माध्यम से पूरा करना है।
रेलवे क्षेत्र में भी दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर रेलखंड का दोहरीकरण तथा राजखरसावां-डांगोआपोसी रेलखंड पर चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी, माल और यात्री ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुगम होगी तथा भीड़भाड़ कम होने के साथ समयबद्ध संचालन को भी मजबूती मिलेगी। सरकार का मानना है कि इन सभी फैसलों से औद्योगिक विकास, निवेश, रोजगार, परिवहन और तकनीकी आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा तथा देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्राप्त होगी।
