झांसी। जल जीवन मिशन की तीन महत्वपूर्ण ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं में लगातार देरी पर उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) ने सख्त कदम उठाते हुए नई दिल्ली की मेसर्स बृजगोपाल कंस्ट्रक्शन कंपनी (बीजीसीसी) के प्रबंध निदेशक राजन गोयल के खिलाफ नवाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। कंपनी पर निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं करने का आरोप है।
बताया गया कि बीजीसीसी को 286 गांवों तक पेयजल आपूर्ति व्यवस्था विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन समयसीमा समाप्त होने के बाद भी केवल 69 गांवों में ही जलापूर्ति शुरू हो सकी है। शेष 217 गांव अब भी योजना के लाभ से वंचित हैं।
मुख्यमंत्री की नाराजगी के बाद हुई कार्रवाई
20 जून को झांसी दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल जीवन मिशन की परियोजनाओं में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद भी कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर जल निगम ने कंपनी के प्रबंध निदेशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
जल निगम (ग्रामीण) के अधिशासी अभियंता मुकेश कुमार सिंह के अनुसार, वर्ष 2020 में बीजीसीसी को इमलौटा, टेहरका और बरथरी ग्राम समूह पेयजल परियोजनाओं के तहत कुल 286 गांवों में पेयजल व्यवस्था विकसित करने का कार्य सौंपा गया था।
286 गांवों में से सिर्फ 69 तक पहुंचा पानी
इमलौटा ग्राम समूह पेयजल परियोजना के अंतर्गत मऊरानीपुर और गुरसराय विकासखंड के 87 गांवों में कार्य 20 जुलाई 2020 से शुरू हुआ था। अनुबंध के अनुसार इसे 19 जुलाई 2022 तक पूरा किया जाना था। बाद में समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई, लेकिन अब तक केवल 18 गांवों में ही जलापूर्ति शुरू हो सकी है।
इसी तरह 93 गांवों वाली टेहरका परियोजना में केवल 23 गांवों तक और 106 गांवों वाली बरथरी परियोजना में मात्र 16 गांवों तक ही पेयजल आपूर्ति पहुंच सकी है। दोनों परियोजनाओं को मूल रूप से 31 अक्तूबर 2022 तक पूरा किया जाना था।
सीओ सिटी रामवीर सिंह ने बताया कि जल निगम की तहरीर पर नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
60 करोड़ का जुर्माना भी नहीं सुधार सका रफ्तार
झांसी जिले में जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2020 में 10 ग्राम समूह पेयजल परियोजनाएं शुरू की गई थीं। इनमें से सात परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बीजीसीसी के जिम्मे तीन परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी की धीमी कार्यप्रगति पर पिछले वर्ष करीब 60 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। साथ ही अतिरिक्त मैनपावर लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आई।
करीब 1,643.04 करोड़ रुपये की इस योजना के तहत 613 गांवों के 2.09 लाख से अधिक घरों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें लगभग 550 करोड़ रुपये के कार्य बीजीसीसी को आवंटित किए गए थे।
दो लाख से अधिक घरों को दिए गए कनेक्शन
जल जीवन मिशन की 10 ग्राम समूह पेयजल परियोजनाओं के तहत कुल 2,01,496 घरों को नल कनेक्शन दिया जाना है। अब तक 2,00,837 घरों में कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं, जबकि 1,44,607 घरों तक नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू हो पाई है।
परियोजना के अंतर्गत 10 इंटेक वेल, 10 जल शोधन संयंत्र (डब्ल्यूटीपी), 102 ओवरहेड टैंक, 67 क्लियर वाटर रिजर्वायर (सीडब्ल्यूआर) और 5,907.78 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण किया गया है।
अधूरी सड़कें बनीं ग्रामीणों की परेशानी
तीनों परियोजनाओं के अधूरे रहने से कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़कें अब तक ठीक नहीं कराई गई हैं। बारिश के कारण इन गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों और ग्राम प्रधानों की लगातार शिकायतों के बावजूद मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका है।
