मामले के अनुसार हसीन जहां ने आरोप लगाया था कि मोहम्मद शमी ने घरेलू खर्च के लिए उन्हें 1 लाख रुपये का चेक दिया था, जो बैंक में जमा करने पर बाउंस हो गया था। इसी आधार पर उन्होंने अदालत का रुख किया और शमी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
बुधवार को अलीपुर की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई, जहां अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर शमी को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। फैसले के बाद शमी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि उन्हें पहले से भरोसा था कि न्याय उनके पक्ष में आएगा, क्योंकि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया था।
शमी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने हर स्थिति को हमेशा ईमानदारी से संभाला है और जो भी वित्तीय जिम्मेदारियां थीं, उन्हें पूरा किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए मैदान के अंदर और बाहर दोनों ही जगह जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि मोहम्मद शमी फिलहाल आईपीएल में लखनऊ सुपर जायंट्स की ओर से खेल रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वह अपने निजी जीवन और कानूनी विवादों को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं।
इस मामले के साथ-साथ शमी और हसीन जहां के बीच भरण-पोषण और गुजारा भत्ते को लेकर कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है। कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार शमी अपनी पत्नी को प्रति माह 1.5 लाख रुपये और बेटी के भरण-पोषण के लिए 2.5 लाख रुपये का भुगतान कर रहे हैं।
वहीं हसीन जहां ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए यह दलील दी है कि यह राशि पर्याप्त नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शमी और पश्चिम बंगाल सरकार दोनों को नोटिस जारी किया है और मामले की सुनवाई जारी है।
