उन्होंने कहा कि भारत में तेजी से हो रहे औद्योगीकरण और बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए केवल पारंपरिक या नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि एक स्थिर और भरोसेमंद आधार-लोड ऊर्जा प्रणाली की आवश्यकता है, जिसमें परमाणु ऊर्जा की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। उनके अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक राष्ट्र के लिए न्यूक्लियर एनर्जी एक अनिवार्य आधार है, जो 24 घंटे निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती है।
बिजनेस लीडर ने यह भी कहा कि अदाणी ग्रुप जैसे बड़े भारतीय औद्योगिक समूहों की भूमिका ऊर्जा और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण हो सकती है। उनके अनुसार इस तरह के समूह बड़े स्तर पर परियोजनाओं को तेजी से लागू करने की क्षमता रखते हैं, जो न्यूक्लियर एनर्जी जैसे जटिल क्षेत्र में भी सहायक साबित हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संबंधित मामलों के समाधान से अब सहयोग और निवेश के नए अवसर खुल सकते हैं।
उन्होंने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा जैसे सौर और पवन ऊर्जा में हुई प्रगति की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि केवल इन स्रोतों पर निर्भरता से बिजली ग्रिड में अस्थिरता की समस्या उत्पन्न हो सकती है। उनके अनुसार बैटरी स्टोरेज और अन्य तकनीकी सीमाओं के कारण सौर ऊर्जा पूरी तरह से निरंतर आपूर्ति देने में सक्षम नहीं है, जबकि परमाणु ऊर्जा इस कमी को पूरा कर सकती है।
विशेषज्ञ ने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों के उपयोग पर भी जोर दिया और कहा कि भारत जैसे बड़े और विविध देश में यदि इस तकनीक को स्थानीय स्तर पर लागू किया जाए तो ऊर्जा उत्पादन और वितरण प्रणाली अधिक कुशल हो सकती है। इससे बड़े ट्रांसमिशन नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी और लागत भी नियंत्रित रह सकेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी कंपनी भारत में पहले से ही सहयोग की संभावनाओं पर काम कर रही है और भारतीय अधिकारियों के साथ बातचीत जारी है। उनके अनुसार यदि भारत विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी के लिए और अधिक खुला दृष्टिकोण अपनाता है तो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से विकास संभव है।
उन्होंने यह भी राय दी कि वैश्विक स्तर पर परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में अधिक अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से तकनीकी नवाचार और सुरक्षा मानकों में सुधार हो सकता है। उनके अनुसार भारत इस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है, बशर्ते नीति और निवेश वातावरण अधिक अनुकूल बनाया जाए।
