इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री का बढ़ता विस्तार है। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए दवाओं की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था नहीं है, जिससे नकली, एक्सपायरी या गलत दवाओं के मरीजों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। संगठन का आरोप है कि इससे आम लोगों की सेहत सीधे तौर पर जोखिम में पड़ रही है।
भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल व्यापार का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और एक मजबूत निगरानी तंत्र तैयार किया जाए।
हालांकि इस बंद से मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना दवाओं पर निर्भर हैं। इसे देखते हुए एसोसिएशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे 19 मई तक ही अपनी आवश्यक दवाएं खरीद लें ताकि 20 मई को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
विशेष रूप से बुजुर्गों, हृदय रोगियों, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को पहले से दवाओं का स्टॉक रखने की सलाह दी गई है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया है कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स इस हड़ताल से बाहर रहेंगे, ताकि गंभीर मरीजों को जरूरी दवाएं मिलती रहें।
हड़ताल के दौरान कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट, बिना निगरानी दवा वितरण और ऑनलाइन बिक्री पर नियंत्रण की कमी को लेकर विरोध जताया जाएगा। संगठन का कहना है कि जब तक सरकार ठोस नियम लागू नहीं करती, तब तक विरोध जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, 20 मई का दिन मध्य प्रदेश में दवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। जहां एक ओर केमिस्ट संगठन अपने अधिकारों और नियमों की मांग को लेकर एकजुट है, वहीं दूसरी ओर आम जनता को अस्थायी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
