यह मामला खंडवा जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र के किसान परिवार से जुड़ा है, जहां रहने वाला किशोर पिछले कई महीनों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था। उसे लगातार थकान, सांस फूलना, घबराहट और कमजोरी की शिकायत थी। धीरे-धीरे उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि कई बार वह बेहोश भी हो जाता था, जिससे परिवार बेहद चिंतित हो गया था।
कई जगह इलाज कराने के बावजूद जब स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो परिवार उसे इंदौर के इंडेक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। यहां जांच में पता चला कि किशोर ‘एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD)’ नामक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित है, जिसमें दिल के ऊपरी हिस्से के बीच एक बड़ा छेद होता है, जो रक्त संचार को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न होने पर जानलेवा भी हो सकता है।
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सुदीप वर्मा के अनुसार, इस केस में ओपन हार्ट सर्जरी की बजाय आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें मरीज के पैर की नस के जरिए कैथेटर डालकर दिल तक पहुंच बनाई गई और फिर विशेष डिवाइस लगाकर छेद को सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि यह तकनीक मरीज के लिए बेहद सुरक्षित है क्योंकि इसमें बड़े चीरे की जरूरत नहीं होती, संक्रमण का खतरा कम होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। ऑपरेशन के बाद किशोर की हालत में तेजी से सुधार देखा जा रहा है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।
इस पूरे इलाज का खर्च आयुष्मान भारत योजना के तहत वहन किया गया, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने डॉक्टरों और अस्पताल प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि इस उपचार ने उनके बेटे को नया जीवन दिया है।
विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में दिल में छेद होने के शुरुआती लक्षणों में जल्दी थकान, सांस फूलना, कमजोरी, बार-बार बेहोश होना और शारीरिक गतिविधियों में परेशानी शामिल हैं। समय पर पहचान और इलाज से इस गंभीर बीमारी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
यह मामला न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र की प्रगति को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाएं मिलकर कई जिंदगियां बचा सकती हैं।
