16 बिखरे परिवार फिर हुए एक, ई-सेवा केंद्र व फ्री लीगल हेल्प डेस्क का शुभारंभ
झांसी। जनपद न्यायालय परिसर में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड 2,72,743 वादों का निस्तारण किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश श्रीमती कमलेश कच्छल ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस मौके पर जनपद न्यायाधीश ने कहा कि तकनीक के समावेश से न्याय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गतिशील बनेगी। उन्होंने आमजन से लोक अदालत में सहभागिता कर न्याय प्रक्रिया को सरल व सुलभ बनाने की अपील की।

राष्ट्रीय लोक अदालत में 154 वैवाहिक, 63 सिविल, 1326 अन्य वादों समेत 11,614 शमनीय आपराधिक मामलों का निस्तारण किया गया। साथ ही सात लाख रुपये से अधिक अर्थदंड वसूला गया। विभिन्न न्यायालयों में 10,537 विद्युत उपभोक्ता वाद, 88,359 जनहित गारंटी अधिनियम वाद, 1058 आपराधिक व 184 राजस्व वादों का भी निस्तारण हुआ। बैंक ऋण और मोबाइल बिल से जुड़े 909 प्रीलिटिगेशन मामलों में छह करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के समझौते कराए गए।
लोक अदालत के अवसर पर न्यायालय परिसर में ई-सेवा केंद्र और फ्री लीगल हेल्प डेस्क का शुभारंभ किया गया। ई-सेवा केंद्र के माध्यम से वादकारियों को केस की जानकारी, ई-फाइलिंग, प्रमाणित प्रतियां, ई-भुगतान और ई-मुलाकात जैसी डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। पारिवारिक न्यायालय की मध्यस्थता से 16 विवादित दंपतियों के बीच सुलह कराई गई। इनमें छह जोड़ों ने पुराने मतभेद भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। न्यायालय परिसर में जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाकर नए जीवन की शुरुआत की।
लोक अदालत में विभिन्न विभागों की ओर से जनकल्याणकारी योजनाओं के स्टॉल भी लगाए गए, जहां लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ मौके पर समस्याओं का समाधान किया गया।
इस अवसर पर शरद कुमार चौधरी, रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव, सुमित परासर सहित बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और वादकारी मौजूद रहे।
