शंकराचार्य के अनुसार, जो भी व्यक्ति गाय लेना चाहेगा, उसके साथ एक एग्रीमेंट किया जाएगा और उसे “गो पालन लाइसेंस” दिया जाएगा। यह लाइसेंस इस बात की पुष्टि करेगा कि व्यक्ति गाय की सेवा और देखभाल के लिए उसे अपने पास रख रहा है। साथ ही समय-समय पर गायों की सेहत और सुरक्षा की जांच भी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि पूरे देश की 4,123 विधानसभाओं में ‘गऊ-धाम’ स्थापित करने की योजना है, जहां जरूरत पड़ने पर गायों को रखा जाएगा और उनकी देखभाल की जाएगी। यह व्यवस्था केवल भारतीय देसी नस्ल की गायों के लिए होगी, विदेशी नस्ल की गायों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।
इस सिस्टम में क्राउड फंडिंग का भी मॉडल रखा गया है, जिसमें कई लोग मिलकर एक गाय की जिम्मेदारी उठा सकेंगे। शंकराचार्य ने कहा कि संस्था के पास कोई बड़ा फंड नहीं है, लेकिन लोगों के सहयोग से इस अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्लेटफॉर्म OLX जैसा जरूर दिखेगा, लेकिन यहां केवल गायों की खरीद की जाएगी। गाय बेचने वाला व्यक्ति ऐप पर अपना विवरण देगा, और संस्था सीधे गाय को “नेग-न्योछावर” देकर अपने संरक्षण में ले लेगी।
गो-LX ऐप को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने बताया कि संस्था का मौजूदा प्लेटफॉर्म 1008.guru पहले से सक्रिय है, और इसी में नई सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। नया ऐप बनाने में लगभग 20–25 दिन का समय लग सकता है।
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि गायों को अलग-अलग राज्यों में बनाए जाने वाले गऊ-धाम में रखा जाएगा, ताकि ट्रांसपोर्ट की समस्या न हो। हर विधानसभा क्षेत्र में एक यूनिट बनाई जाएगी, जिसे एक केंद्रीय टीम और SOP के तहत संचालित किया जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस योजना का उद्देश्य गायों को सुरक्षित रखना है, न कि व्यापार करना। यदि कोई व्यक्ति सेवा करने में सक्षम नहीं होता, तो गाय को वापस गऊ-धाम में सौंपने का प्रावधान भी रखा गया है।
इस तरह गो-LX ऐप को गोरक्षा और गोसेवा के एक नए मॉडल के रूप में पेश किया गया है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में देसी गायों के संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी।
