जांच में सामने आया है कि उपलब्ध फुटेज में कुछ जगहों पर छेड़छाड़ के संकेत भी मिले हैं, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई है। इसी कारण अब जांच मुख्य रूप से फोरेंसिक विश्लेषण, कर्मचारियों के बयान और पूछताछ में सामने आ रहे तथ्यों पर केंद्रित हो गई है। एसआईटी लगातार संदिग्ध कर्मचारियों और संबंधित पदाधिकारियों से अलग अलग पूछताछ कर रही है ताकि घटनाक्रम की परतें खोली जा सकें।
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े एक पूर्व पदाधिकारी द्वारा लगाए गए आरोपों में यह भी कहा गया था कि कुछ महीनों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग डिलीट की गई थी। हालांकि तकनीकी सीमाओं और बैकअप उपलब्ध न होने के कारण इन दावों की पुष्टि करना कठिन साबित हो रहा है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि हाल के 45 दिनों में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है तो उसके साक्ष्य मिलने की संभावना अधिक है, लेकिन उससे पहले की घटनाओं को प्रमाणित करना चुनौतीपूर्ण है।
सूत्रों के अनुसार, जांच में अब तक पूछताछ के दौरान कई विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। कुछ संदिग्धों ने लंबे समय से वित्तीय हेरफेर की बात स्वीकार करने के संकेत दिए हैं, जिससे जांच को एक नई दिशा मिली है। हालांकि यह स्पष्ट करना अभी बाकी है कि कथित गड़बड़ी कब से और किस स्तर पर चल रही थी।
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कथित रूप से नकदी और अन्य चढ़ावे की राशि के प्रबंधन में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। लेकिन बिना मजबूत डिजिटल साक्ष्य के केवल बयानों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना आसान नहीं होगा। इसी वजह से एसआईटी का फोकस अब तकनीकी जांच, फोरेंसिक रिपोर्ट और क्रॉस वेरिफिकेशन पर बढ़ गया है।
पूरे मामले में जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि सीमित सीसीटीवी डेटा और विवादित आरोपों के बीच वास्तविक सच्चाई को निष्पक्ष तरीके से सामने लाया जाए। जांच आगे बढ़ने के साथ ही उम्मीद है कि नए तथ्य सामने आएंगे, जो पूरे प्रकरण की परतें खोल सकते हैं।
