महराजगंज में स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में रही, जहां कई पंप बंद हो गए और सिर्फ एक पंप पर ईंधन उपलब्ध बताया गया। रात के समय लोग पंपों के बाहर मच्छरदानी लगाकर इंतजार करते दिखे ताकि सुबह तेल मिलने पर वे पहले भरवा सकें। वहीं बस्ती जिले में सीमित मात्रा में ईंधन वितरण की व्यवस्था की गई है, जिसमें बाइक और कार के लिए अलग-अलग लिमिट तय की गई है।
मऊ और संतकबीर नगर जैसे जिलों में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। इसके अलावा कई जगहों पर ईंधन वितरण को लेकर निगरानी बढ़ा दी गई है।
हालांकि तेल कंपनियों और प्रशासन का कहना है कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और यह स्थिति अफवाहों के कारण बनी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक भीड़ न लगाएं और घबराहट में अतिरिक्त ईंधन जमा न करें।
इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है, जहां विपक्ष ने बढ़ती कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वहीं आम जनता का कहना है कि ईंधन रोजमर्रा की जरूरत है, इसलिए वे मजबूरी में लंबी कतारों में खड़े हैं।
