26 मई 1988 को सियाचिन ग्लेशियर के बाना पोस्ट पर तैनात कैप्टन प्रताप सिंह ने दुश्मन की घुसपैठ को नाकाम करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। ऑपरेशन के दौरान हुए माइंस ब्लास्ट में वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, लेकिन उन्होंने अंतिम सांस तक साहस दिखाते हुए दुश्मन की मदद के लिए लगाई गई रस्सी की सीढ़ी को काट दिया, जिससे घुसपैठ पूरी तरह विफल हो गई। उनकी इसी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।
सेना के जवानों ने कहा कि शहीद सिर्फ इतिहास नहीं होते, बल्कि वे हर जवान और हर नागरिक के लिए प्रेरणा होते हैं। इसी भावना के तहत जवानों ने आम लोगों के बीच जाकर सेवा का संदेश दिया और शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान सड़क से गुजर रहे लोग भी रुके और जवानों के साथ शहीद को नमन किया।
