रिपोर्ट्स और जांचों के मुताबिक कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में ऐसे युवाओं को शामिल किया गया जिनकी पहचान बदलकर या फर्जी नामों के जरिए उन्हें आगे इस्तेमाल किया गया। एटीएस की कार्रवाई में कुछ ऐसे मॉड्यूल पकड़े गए हैं जिनमें धर्मांतरण से जुड़े मामलों के साथ-साथ संदिग्ध विदेशी संपर्क और फंडिंग के संकेत मिले हैं।
वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि ये लोग विदेशी फंडिंग के जरिए ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल कर रहे थे। इसी तरह मौलाना कलीम सिद्दीकी का नाम भी एक अलग मामले में सामने आया था, जिसमें जांच एजेंसियों ने अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोप लगाए थे।
हाल के वर्षों में बलरामपुर और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाकर लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। कुछ मामलों में विदेश से फंडिंग और संपर्क के संकेत भी जांच एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, हालांकि हर केस की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे नेटवर्क आमतौर पर तीन चरणों में काम करते हैं—पहला भावनात्मक या डिजिटल संपर्क, दूसरा आर्थिक या सामाजिक प्रलोभन, और तीसरा विचारधारा आधारित प्रभाव। इसके लिए टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
एटीएस का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, जिसकी जांच लगातार जारी है और कई मामलों में गिरफ्तारियां और पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, हर मामले में निष्कर्ष अदालत और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
