विजय कुमार गोयल को उत्तर भारत के चीनी उद्योग का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उन्होंने धामपुर शुगर मिल सहित कई शुगर यूनिट्स की स्थापना की और गन्ना उत्पादन व चीनी उद्योग में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया। उनके नेतृत्व में यह उद्योग न सिर्फ मजबूत हुआ बल्कि हजारों लोगों को रोजगार भी मिला। उन्हें उनके योगदान के लिए “चीनी उद्योग का भीष्म पितामह” भी कहा जाता था।
गोयल केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी भी थे। उनके जीवन की सबसे प्रेरणादायक घटना तब सामने आई जब उन्होंने एक अनजान व्यक्ति को अपनी एक किडनी दान कर दी थी। बताया जाता है कि उन्होंने अखबार में एक मेधावी इंजीनियर की गंभीर हालत के बारे में पढ़ने के बाद बिना किसी को बताए हैदराबाद जाकर किडनी ट्रांसप्लांट कर दिया था। यह घटना उनके निस्वार्थ स्वभाव का बड़ा उदाहरण मानी जाती है।
उनके परिवार और कर्मचारियों के अनुसार, विजय कुमार गोयल हमेशा अपने उद्योग से जुड़े लोगों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए काम करते रहे। वे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा, खेल और विकास में विशेष रुचि लेते थे। उन्होंने स्क्वैश जैसे खेलों के लिए सुविधाएं भी विकसित कराईं, जिससे कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का मौका मिला।
गोयल को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। उनका पूरा जीवन उद्योग, सेवा और मानवता के समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
उनका अंतिम संस्कार दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में किया गया, जहां उनके पुत्र गौतम गोयल ने मुखाग्नि दी। उद्योग जगत के कई दिग्गजों, कर्मचारियों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
विजय कुमार गोयल का निधन न केवल एक उद्योगपति की विदाई है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का अंत है जिसने अपने काम और सेवा दोनों से समाज में गहरी छाप छोड़ी।
