यह फैसला न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने ‘निवास कॉलोनाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया। कोर्ट ने एडीएम (न्यायिक) द्वारा 10 मार्च को पारित उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें विवादित भूमि पर निर्माण और बिक्री पर रोक लगाई गई थी।
मामले में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि बिना किसी ठोस आधार और अधिकार क्षेत्र के उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। आरोप था कि एक अधिवक्ता की शिकायत पर जिलाधिकारी ने बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए मामला दर्ज कर उसे एडीएम (न्यायिक) को भेज दिया, जिन्होंने बिना जांच के ही अंतरिम आदेश जारी कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के अनुसार इस तरह के मामलों की शुरुआती जांच और कार्रवाई का अधिकार केवल उपजिलाधिकारी (SDM) के पास होता है। लेकिन इस केस में DM और ADM ने पूरी कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया।
हाई कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि शिकायतकर्ता अधिवक्ता ने अपने कानूनी ज्ञान का दुरुपयोग करते हुए विवाद को गलत दिशा देने और पक्षकार को दबाव में लाने का प्रयास किया।
अदालत ने कहा कि बिना प्रथम दृष्टया जांच के आदेश पारित करना न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है। इसी आधार पर DM और ADM दोनों को 6 सप्ताह के भीतर अपने निजी खातों से जुर्माना राशि जमा करने का आदेश दिया गया है।
