आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2024 के बीच सड़क हादसों और उनसे होने वाली मौतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि 2025 में कुल सड़क दुर्घटनाओं की संख्या घटकर 52 हजार 125 रह गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 56 हजार 669 था। इसके बावजूद राहत नहीं मिली, क्योंकि सड़क हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 14 हजार 842 पहुंच गई। यह दर्शाता है कि दुर्घटनाओं की संख्या कम होने के बावजूद उनकी गंभीरता और घातक प्रभाव बढ़ा है।
देश के अन्य राज्यों से तुलना करें तो तमिलनाडु में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या सबसे अधिक दर्ज की गई है। वहीं उत्तर प्रदेश में सड़क हादसों में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हो रही है। उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 136 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन इनमें करीब 75 लोगों की जान चली जाती है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में हादसों की संख्या अधिक होने के बावजूद प्रतिदिन औसतन 40 लोगों की मौत दर्ज की गई है। यह स्थिति राज्य में सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।
बढ़ती दुर्घटनाओं और मौतों को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार 4E रणनीति पर काम कर रही हैं। इसका पहला हिस्सा एजुकेशन एंड अवेयरनेस है, जिसके तहत ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान तथा क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह और विभिन्न जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वाहन चलाने और यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दूसरा महत्वपूर्ण पहलू इंजीनियरिंग है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर उन्हें सुधारा जा रहा है। नए और पुराने राजमार्गों का थर्ड पार्टी रोड सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है। साथ ही वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रंट एयरबैग, एंटी लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), ओवरस्पीड वार्निंग सिस्टम, रिवर्स पार्किंग सेंसर और सीट बेल्ट रिमाइंडर जैसी सुविधाएं अनिवार्य कर दी गई हैं। वाहन सुरक्षा के लिए भारत एनकैप (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट रेटिंग भी लागू की गई है।
तीसरे चरण इन्फोर्समेंट एंड टेक्नोलॉजी के तहत मोटर वाहन संशोधन अधिनियम 2019 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जा रहा है। यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, स्पीड रडार और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन सिस्टम के जरिए निगरानी बढ़ाई गई है तथा ई-चालान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
चौथा महत्वपूर्ण हिस्सा इमरजेंसी केयर है। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाकर कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हिट एंड रन मामलों में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के लिए मुआवजा 50 हजार रुपये और मृत्यु की स्थिति में 2 लाख रुपये तक कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों को कम करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना, शराब पीकर ड्राइविंग, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना जैसी आदतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। जब तक यातायात नियमों के प्रति लोगों में जागरूकता और जिम्मेदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक सड़क दुर्घटनाओं और उनसे होने वाली मौतों में अपेक्षित कमी लाना चुनौती बना रहेगा।
