अध्यक्षीय संबोधन के दौरान राज्यपाल ने फाइनेंस कंट्रोलर और कुलसचिव से पूछा कि आखिर हॉस्टलों में बिजली की समस्या अब तक क्यों बनी हुई है। उन्होंने कहा कि छात्रों को कपड़े धोने के लिए वॉशिंग मशीन जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय के पास बजट की कमी है और यदि नहीं तो फिर इन सुविधाओं को अब तक क्यों नहीं सुधारा गया। राज्यपाल की इस टिप्पणी पर सभागार में मौजूद छात्र-छात्राओं ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया।
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने एक क्लिक के जरिए सभी 996 विद्यार्थियों की डिग्रियां डिजिलॉकर पर जारी कीं। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि छात्र डिजिलॉकर का अपेक्षित उपयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब सरकार बेहतर डिजिटल सुविधाएं उपलब्ध करा रही है तो उनका अधिक से अधिक इस्तेमाल होना चाहिए। उन्होंने परीक्षा नियंत्रक को कम डाउनलोड के कारणों की जानकारी लेकर राजभवन में प्रस्तुत होने के निर्देश भी दिए।
समारोह में कुल 996 छात्र-छात्राओं को 1071 डिग्रियां प्रदान की गईं। कुछ विद्यार्थियों को मेजर और माइनर पाठ्यक्रम पूरा करने के कारण दो-दो डिग्रियां भी मिलीं। विश्वविद्यालय के मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र प्रज्ञान वर्मा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक और एक प्रायोजित स्वर्ण पदक सहित तीन सम्मान प्रदान किए गए। इसके साथ ही उन्हें 40 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया। कुल 47 मेधावी छात्र-छात्राओं को विभिन्न पदकों और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।
राज्यपाल ने छात्राओं को तकनीकी शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में आगे आने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और तकनीक के क्षेत्र में भी उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने उन्नाव की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट और शैक्षणिक सामग्री वितरित करते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान देने की बात कही। समारोह में प्रस्तुति देने वाले स्कूली बच्चों से बातचीत कर उन्हें चॉकलेट देकर उनका उत्साह भी बढ़ाया।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और एफडीडीआई के अध्यक्ष राजेंद्र कुमार जालान ने स्वयं को HBTU का पूर्व छात्र बताते हुए कहा कि इस संस्थान ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और आज यहां से निकलने वाले विद्यार्थी भी देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाएंगे।
शिक्षा, उपलब्धियों और सम्मान के इस समारोह में राज्यपाल का प्रशासन को दिया गया स्पष्ट संदेश सबसे अधिक चर्चा का विषय रहा। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीकी संस्थानों में केवल उत्कृष्ट परिणाम ही नहीं, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी विश्वविद्यालय की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
