लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने संकेत दिए हैं कि राज्य में भी वक्फ संशोधन कानून के प्रावधानों के अनुरूप नया वक्फ बोर्ड गठित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी नए नियमों के तहत बोर्ड का गठन होगा, जिसमें विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व के साथ गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा।
नए बोर्ड में सभी वर्गों को मिलेगा प्रतिनिधित्व
दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि प्रस्तावित वक्फ बोर्ड में शिया, सुन्नी, पिछड़े, पसमांदा मुसलमानों और महिलाओं को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा, कानून के प्रावधानों के अनुसार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को भी नामित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के अनुरूप कई राज्यों में नए बोर्डों के गठन की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है।
मोहसिन रजा ने किया समर्थन
भाजपा नेता मोहसिन रजा ने मंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वक्फ संशोधन का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जिन पर वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में करीब 1.27 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनका अब तक समुचित ऑडिट नहीं हुआ। उनके अनुसार, जब सरकार ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करती है तो संबंधित पक्ष सहयोग नहीं करते।
समाजवादी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का किया जिक्र
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मामले में न्यायालय की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उनका कहना था कि जब तक शीर्ष अदालत का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक राज्य सरकार को इस संबंध में नई नियुक्तियों या अन्य कदमों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े मामलों में सावधानी बरतना आवश्यक है, ताकि भविष्य में अन्य धार्मिक स्थलों को लेकर भी इसी तरह के कानूनी विवाद उत्पन्न न हों।
मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी की प्रतिक्रिया
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन बरेलवी ने कहा कि अतीत में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्डों के कुछ जिम्मेदार पदाधिकारियों पर वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने कहा कि वक्फ की मूल भावना और दानदाताओं की मंशा के अनुरूप संपत्तियों का उपयोग होना चाहिए तथा प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
