मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि एवं नई ऊर्जा का संचार होता है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में लोगों ने सुबह-सुबह स्नान कर पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य भी किया।
स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने परंपरागत रूप से घरों में खीर-पूरी बनाकर प्रसाद ग्रहण किया। कई स्थानों पर लोगों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न अनुष्ठान भी किए।
शाम के समय कुछ क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार खेतों में आग लगाने की भी रिवाज निभाई गई, जिसे लोग पुराने समय से चली आ रही परंपरा मानते हैं।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। जिला पंचायत की ओर से घाटों पर बैरिकेडिंग की गई थी, जबकि स्थानीय पुलिस लगातार निगरानी करती रही ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। पूरे आयोजन के दौरान माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण और भक्तिमय बना रहा।
