“अधूरा सच” नाट्य प्रस्तुति ने झकझोरा मन, नारी सम्मान के संदेश से गूंजा सभागार
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान एवं राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा मिशन शक्ति फेस-5 के अंतर्गत गांधी सभागार में “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023” के तहत पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशिष्ट अतिथियों ने नारी सशक्तिकरण, शिक्षा एवं समान अधिकारों पर अपने विचार व्यक्त किए तथा विद्यार्थियों की प्रतिभाओं की सराहना की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे उप कुलसचिव (वित्त) सुनील सेन ने अपने वक्तव्य में कहा कि नारी के बिना यह संसार अधूरा है। उन्होंने नारी की उद्यमिता और रचनात्मक क्षमता की प्रशंसा करते हुए कहा कि महिलाओं ने ऐसे-ऐसे कार्य किए हैं, जिनकी कल्पना करना भी कठिन है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि नारी शिक्षा अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक शिक्षित नारी पूरे परिवार को शिक्षित एवं संस्कारित बनाती है, जिससे समाज के समग्र विकास को गति मिलती है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. आनंद चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि “नारी सर्वत्र पूज्यते” अर्थात नारी की पूजा ही सबसे श्रेष्ठ है। उन्होंने कहा कि नारी के बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी है, क्योंकि वही जीवन का सृजन करती है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में नारी ने अपने कला कौशल, परिश्रम और संकल्प के बल पर विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान स्थापित की है। चाहे वह गृहणी हो, सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत हो या शासकीय पदों पर आसीन—हर क्षेत्र में नारी ने अपनी क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है और सदैव वंदनीय रही है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. नीति शास्त्री ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्वयं एक नारी होने के नाते महिलाओं के संघर्षों को भलीभांति समझती हैं। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में अनेक महिलाएं कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय के साथ आगे बढ़ रही हैं और अपनी पहचान स्थापित कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह उनके समग्र विकास के लिए अनिवार्य है। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि देश के सर्वोच्च पद पर भी आज एक महिला आसीन है, जो नारी शक्ति का प्रतीक है।

मुख्य अतिथि इंजीनियर भारती आर्य, ब्लॉक प्रमुख बंगरा (झांसी) ने अपने संबोधन में कहा कि गांव हो या शहर, हर क्षेत्र में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने नारी के स्वावलंबन और उनके लिए संचालित विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र और निष्पक्ष रूप से कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए, तभी उनकी वास्तविक कार्यकुशलता सामने आ सकेगी। उन्होंने ललित कला संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा निर्मित चित्रों का अवलोकन कर उनकी सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थी अत्यंत लगन और मेहनत से कार्य कर रहे हैं तथा विश्वविद्यालय को गौरवान्वित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यहां की कला केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि प्रदेश के बाहर भी प्रदर्शित होनी चाहिए, क्योंकि प्रत्येक चित्र अपने आप में विशिष्ट महत्व रखता है।
कार्यक्रम संयोजक एवं समन्वयक डॉ. श्वेता पांडेय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह आयोजन कुलाधिपति एवं महामहिम राज्यपाल के निर्देशानुसार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्लोगन प्रतियोगिता, छायांकन, चित्रकला, पोस्टर निर्माण तथा नाटक मंचन जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को इस अवसर पर पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रंगचित्रा थिएटर ग्रुप द्वारा प्रस्तुत नाटक “अधूरा सच” रहा, जिसका मंचन नारी सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण मुद्दों पर आधारित था। नाटक का मुख्य विषय “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और बेटों को समझाओ” रहा, जिसने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। इस नाटक में दीपिका राजपूत, प्रिया यादव, स्वेक्षा, दिव्या, सलोनी, फैसल, आदर्श, रुद्र, अमित, सुमित एवं अंकित ने प्रभावशाली अभिनय किया। नाटक की पटकथा एवं निर्देशन डॉ. श्वेता पांडेय द्वारा किया गया, जबकि सहायक निर्देशन गजेंद्र सिंह ने संभाला। दर्शकों ने नाटक की भावनात्मक प्रस्तुति और संदेश की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
कार्यक्रम का संचालन सहसंयोजक गजेंद्र सिंह द्वारा किया गया। वहीं, डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपनी रचनात्मकता और नवीन कल्पनाशक्ति के माध्यम से विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करें। इस आयोजन को सफल बनाने में डॉ. दिलीप कुमार, गोविंद यादव, डॉ. रितु शर्मा, डॉ. प्रशांत मिश्रा, डॉ. रानी शर्मा, डॉ. बृजेश कुमार, डॉ. संतोष कुमार सहित संस्थान के समस्त शिक्षक एवं विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसकी सभी ने सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में सभी विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र वितरित किए गए। यह आयोजन न केवल नारी सशक्तिकरण के संदेश को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को भी एक सशक्त मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
