झांसी। ट्रांसजेंडर समुदाय के संवैधानिक अधिकारों, कल्याणकारी योजनाओं के बजट और उनके पारदर्शी क्रियान्वयन से जुड़े मामले में किन्नर शक्ति फाउंडेशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। रिट याचिका (सिविल) संख्या 895/2026 किन्नर शक्ति फाउंडेशन के अध्यक्ष शुभम गौतम एवं अंजलि अनुरागी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है।
याचिका में ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि संशोधित कानून ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के स्व-पहचान के अधिकार को प्रभावित करता है और सर्वोच्च न्यायालय के नालसा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2014) के फैसले की भावना के विपरीत है।
याचिका में पहचान प्रमाणपत्र, पहचान पत्र, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा तथा सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और बजट में पारदर्शिता का मुद्दा भी उठाया गया है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों और बजट ऑडिट के आधार पर स्माइल योजना, गरिमा गृह, कौशल विकास और ट्रांसजेंडर कल्याण योजनाओं में कथित विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे, ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले को समान प्रकृति की लंबित याचिका संख्या 548/2026 के साथ टैग कर दिया। अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता प्रदीप शर्मा, तरुण सिंह, अनिल सिंह पटेल तथा एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनिल कुमार ने पक्ष रखा। केंद्र सरकार की ओर से एम.के. मारोरिया ने नोटिस स्वीकार किया।
