नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में मंगलवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) के आह्वान पर शिक्षकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय परिसर में आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित 21 सूत्रीय मांगपत्र तथा जिले से जुड़ी शिक्षा संबंधी समस्याओं का ज्ञापन जिला विद्यालय निरीक्षक को सौंपा। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने चाहिए, जिससे प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
धरने को संबोधित करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि इससे सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्तर पर व्यापक सुधारों की आवश्यकता है।
शिक्षक नेताओं ने कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई। इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से संबंधित सेवा सुरक्षा प्रावधानों को यथावत बनाए रखने, तदर्थ प्रधानाचार्यों को नियमित वेतन देने तथा ऑनलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को दूर करने की भी मांग की गई। उनका कहना था कि इन मुद्दों का सीधा प्रभाव शिक्षकों के मनोबल और शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता पर पड़ता है।
धरने के दौरान शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। संगठन ने सभी कार्यालयों में ई-फाइलिंग व्यवस्था लागू करने और शासनादेश के अनुरूप प्रत्येक पटल पर तीन दिन के भीतर फाइलों के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी। शिक्षकों का कहना था कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में राज्य शिक्षा आयोग के गठन की आवश्यकता भी बताई। इसके साथ ही 18 वर्ष तक के बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग दोहराई गई। संगठन ने स्ववित्तपोषित और वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करने तथा छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने की भी मांग रखी।
शिक्षक संघ ने यह भी कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज किया जाना चाहिए, ताकि उनकी सेवा से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रह सके। संगठन का मानना है कि इससे भविष्य में शिक्षकों को मिलने वाली सुविधाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता आएगी।
धरने के समापन पर संगठन के प्रतिनिधियों ने जिला विद्यालय निरीक्षक को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं मौजूद रहीं तथा उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर एकजुटता दिखाई। संगठन ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लेगी।
