भरत यादव और जमीन निवेश के मुद्दे पर उठाए सवाल
कहा- सैफई परिवार जमीन खाने में बहुत अनुभवी
पूर्व राज्यसभा सांसद चंद्रपाल सिंह को बताया अखिलेश यादव का ‘कुबेर’
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए सभी दलों ने शंखनाद कर दिया है। इलेक्शन मोड में आने के बाद सभी दल एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव,राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटाए जाने को लेकर बदनाम करने के दिए गए बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया पर तीखा पलटवार किया है। राजभर ने एक्स पर एक खुला पत्र जारी कर अखिलेश यादव पर कई गंभीर आरोप लगाए और उनके रिश्तेदारों व कथित निवेशों को लेकर सवाल खड़े किए। राजभर के लेटर बम अटैक से राजनैतिक गलियारों में हड़कम्प मच गया है।
राजभर ने अपने पत्र में कहा कि अखिलेश यादव मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम पर “अनावश्यक हल्ला” मचा रहे हैं और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी भरत यादव, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य सड़क विकास निगम के चेयरमैन हैं, सपा के पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता रहे चंद्रपाल यादव के दामाद हैं। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से छिपा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से जुड़ी जमीनों में निवेश को लेकर अखिलेश यादव की बेचैनी दिखाई दे रही है। राजभर ने आरोप लगाया कि भरत यादव के माध्यम से सपा से जुड़े लोगों ने वहां बड़े पैमाने पर निवेश किया है और इसी कारण अखिलेश यादव इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपना रहे हैं।
राजभर ने सैफई परिवार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “जमीन खाने के मामले में सैफई परिवार बहुत अनुभवी है।” उन्होंने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे परियोजना का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान एक्सप्रेसवे के मार्ग को सैफई तक ले जाने के लिए बदला गया था, जिससे कुछ लोगों को जमीन अधिग्रहण और मुआवजे के जरिए लाभ पहुंचा।
उन्होंने यह भी कहा कि गोमती रिवर फ्रंट परियोजना की रिपोर्ट सामने आने के बाद सपा नेतृत्व चिंतित है और उसे डर है कि कहीं मध्य प्रदेश की परियोजनाओं से जुड़े तथ्यों की भी जांच न हो जाए। राजभर ने मांग की कि जांच एजेंसियां यह पता लगाएं कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के किन-किन प्रभावशाली लोगों ने निवेश किया है।
हालांकि, राजभर द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस बयानबाजी को आगामी चुनावी रणनीति और बढ़ती सियासी तल्खी से जोड़कर देखा जा रहा है।
