मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव का विधिपूर्वक पूजन करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मकता की अनुभूति हो सकती है। इस दिन शिवलिंग पर अलग-अलग सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा भी रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं में कुछ विशेष सामग्रियों को अलग-अलग ग्रहों से जोड़ा जाता है और उनके माध्यम से ग्रहों की अनुकूलता की कामना की जाती है।
सबसे सरल और व्यापक रूप से प्रचलित उपाय शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना है। पूजा के दौरान स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित किया जाता है। धार्मिक परंपरा में जलाभिषेक को शांति और शिव आराधना का सहज माध्यम माना गया है।
चंद्रमा से संबंधित मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन की कामना के लिए दूध से शिवलिंग का अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। सावन सोमवार पर शुद्ध दूध अर्पित करते समय भक्त भगवान शिव से मन की स्थिरता और जीवन में सौम्यता बनाए रखने की प्रार्थना कर सकते हैं। यह पूरी तरह धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित उपाय है।
गुरु और शुक्र की अनुकूलता की कामना के लिए शहद से अभिषेक करने का भी उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में शहद को मधुरता और शुभता से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इसे वाणी में मधुरता, संबंधों में सौहार्द और पारिवारिक जीवन में सुख की कामना के साथ भगवान शिव को अर्पित किया जाता है।
शनि तथा राहु-केतु से जुड़ी बाधाओं की शांति की कामना के लिए काले तिल से अभिषेक करने की परंपरा भी बताई जाती है। ज्योतिषीय मान्यताओं में काले तिल का संबंध शनि से माना गया है। हालांकि किसी भी ग्रह की स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर व्यक्तिगत कुंडली के आधार पर उपाय अलग हो सकते हैं।
सावन में गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक भी धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। इसे सुख, समृद्धि और मनोकामना की पूर्ति की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इस अभिषेक को पूजा का हिस्सा बना सकते हैं।
10 अगस्त को प्रदोष काल में पंचाक्षरी मंत्र ओम नमः शिवाय का जाप, बिल्वपत्र अर्पित करना और दीपदान करना भी शिव आराधना का हिस्सा बनाया जा सकता है। सुबह जलाभिषेक और शाम को प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा करने की परंपरा का पालन किया जा सकता है।
हालांकि नवग्रह शांति के लिए एक ही उपाय हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। ज्योतिषीय दृष्टि से किसी विशेष ग्रह से जुड़ी परेशानी के लिए जन्मकुंडली में ग्रह की स्थिति, भाव, राशि, दशा और गोचर को देखकर उपाय तय करने की बात कही जाती है। इसलिए धार्मिक उपायों को श्रद्धा और व्यक्तिगत परिस्थिति के अनुसार अपनाना अधिक उचित माना जाता है।
