मामले की जांच के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच में शराब में जहरीले पदार्थ की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर विस्तृत जांच के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने इसे सुनियोजित हत्या बताते हुए कठोर सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपियों के परिवार में कमाने वाला कोई और नहीं है, इसलिए नरमी बरती जाए। दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपियों को दोषी करार दिया और सजा सुनाई।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि लगाए गए जुर्माने की 75 प्रतिशत राशि मृतक के भाई रवि वर्मा को मुआवजे के रूप में दी जाए। फैसले के समय दोनों आरोपी जमानत पर बाहर थे, लेकिन सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। बताया गया है कि आरोपी सुनील कुमार की पश्चिम बंगाल में सरकारी नौकरी भी लगी हुई थी, जिस पर अब संकट खड़ा हो गया है।
