
उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन Cy-Vajra’ के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जिले की खुर्जा नगर और डिबाई थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी और म्यूल अकाउंट रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर देश के विभिन्न हिस्सों में हुई ऑनलाइन ठगी की रकम को बैंक खातों के माध्यम से स्थानांतरित करने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण और आर्थिक अपराधों के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी भोले-भाले लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। कई मामलों में आरोपी अपने निजी बैंक खातों का भी इस्तेमाल करते थे। इस प्रकार के खातों को साइबर अपराध की भाषा में म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका उपयोग अवैध धन के लेनदेन को छिपाने के लिए किया जाता है।
खुर्जा नगर पुलिस ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग प्रणाली और अन्य उपलब्ध डिजिटल डाटा का विश्लेषण किया। जांच में कई ऐसे बैंक खाते सामने आए, जिनमें विभिन्न राज्यों से साइबर ठगी की रकम जमा की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। प्रारंभिक जांच में इनके खातों के खिलाफ कई साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज होने की पुष्टि हुई है। अलग-अलग मामलों में हजारों रुपये की ठगी की रकम इन खातों के माध्यम से लेनदेन होने की जानकारी भी सामने आई है।
इसी अभियान के तहत डिबाई थाना पुलिस ने एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया। बैंक दस्तावेज, अकाउंट ओपनिंग फॉर्म और बैंक स्टेटमेंट की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे साक्ष्य मिले, जिनसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के एक मामले का खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी के खाते के माध्यम से पीड़ित से ठगी गई राशि का लेनदेन किया गया था। पुलिस ने संबंधित दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
गिरफ्तार सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं तथा साइबर ठगी की रकम किन-किन राज्यों से इन खातों में पहुंच रही थी। डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग लेनदेन और मोबाइल डेटा की भी विस्तृत जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में म्यूल अकाउंट का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, इसलिए ऐसे नेटवर्क की पहचान कर उन्हें समाप्त करना प्राथमिकता है। लोगों से भी अपील की गई है कि वे किसी अन्य व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते का उपयोग या संचालन न करें और किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। अधिकारियों का मानना है कि तकनीकी निगरानी, वित्तीय विश्लेषण और सतर्क नागरिकों के सहयोग से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।
