
उत्तर प्रदेश की 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने एक बार फिर अपनी लंबित मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन किया। निशातगंज स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पहुंचे अभ्यर्थियों ने सरकार से 6800 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी ढंग से पक्ष रखने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि कई वर्षों से लगातार आंदोलन करने के बावजूद अब तक उन्हें न्याय और नियुक्ति का इंतजार है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्ष 2018 में निकली 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े मामले का अंतिम समाधान अब भी नहीं हो पाया है। उनका दावा है कि भर्ती से संबंधित विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, लेकिन सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं होने के कारण प्रक्रिया लगातार आगे नहीं बढ़ पा रही है। अभ्यर्थियों ने मांग की कि आगामी 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई में सरकार पूरी तैयारी के साथ अपना पक्ष रखे ताकि मामले का शीघ्र निस्तारण हो सके।
प्रदर्शन के दौरान कुछ अभ्यर्थियों ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के एक कथित बयान का भी उल्लेख करते हुए नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि सरकार में शामिल होने से पहले संबंधित नेता उनकी मांगों का समर्थन करते थे, लेकिन अब इस मुद्दे पर अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लंबे समय से संघर्ष कर रहे युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनके भविष्य से जुड़े इस मामले का जल्द समाधान निकलना चाहिए।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट में अब तक कई बार सुनवाई की तारीख लग चुकी है, लेकिन प्रत्येक सुनवाई में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। उनका कहना है कि अदालत में समय पर और प्रभावी ढंग से पक्ष रखे जाने से मामले के शीघ्र समाधान की संभावना बढ़ सकती है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने सरकार से कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करने और नियुक्ति संबंधी सभी आवश्यक कदम समय पर उठाने की अपील की।
प्रदर्शन में शामिल कई अभ्यर्थियों ने अपने लंबे संघर्ष का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि बीते छह वर्षों से वे लगातार आंदोलन कर रहे हैं और नौकरी की उम्मीद में विभिन्न स्तरों पर अपनी बात रख चुके हैं। उनका दावा है कि इस संघर्ष का असर उनके व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ा है। कई अभ्यर्थियों ने कहा कि रोजगार नहीं मिलने के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और अधिकांश समय आंदोलन तथा कानूनी प्रक्रिया में ही व्यतीत हो रहा है।
प्रदर्शन में शामिल कुछ महिला अभ्यर्थियों ने भी अपनी परिस्थितियों को साझा किया। उनका कहना था कि छोटे बच्चों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे लगातार आंदोलन में शामिल हो रही हैं क्योंकि नियुक्ति ही उनके परिवार के बेहतर भविष्य का आधार बन सकती है। उनका मानना है कि वर्षों की मेहनत और चयन प्रक्रिया में भाग लेने के बाद भी नौकरी नहीं मिलना उनके लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि अपनी वैध मांगों को सरकार तक पहुंचाना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगामी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में प्रभावी पैरवी होगी और लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप मिलेगा। फिलहाल सभी अभ्यर्थियों की नजर 21 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई है, जिससे उन्हें अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।
