जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रोफेसर ने 14 और 15 मई की रात छात्रा को कई बार कॉल कर उसे मिलने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। छात्रा ने बातचीत रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा कर दी, जिसमें प्रोफेसर द्वारा “डार्लिंग”, “पेपर आउट कर दिया है” और “मिलने आना पड़ेगा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। पुलिस के अनुसार इन ऑडियो में परीक्षा की गोपनीयता और छात्रा की गरिमा का गंभीर उल्लंघन पाया गया है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और विशाखा कमेटी को जांच सौंपी है। वहीं, पुलिस ने आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अध्यादेश 2024 और बीएनएस की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी शामिल है।
फिलहाल आरोपी प्रोफेसर को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। विश्वविद्यालय ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा और नैतिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
