आयुर्वेद, इतिहास, साहित्य और समकालीन विषयों पर हुई चर्चा
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले के दूसरे दिन ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में साहित्यकारों ने अपनी कृतियों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में पुस्तकों की समाज में सकारात्मक भूमिका पर जोर दिया गया।
डॉ. सुनीता वर्मा ने अपनी पुस्तक ‘आयुर्वेद मर्मज्ञ गोस्वामी तुलसीदास’ पर चर्चा करते हुए बताया कि इसे लिखने में 14 वर्ष लगे। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद जीवन पद्धति है, जिसमें आहार-विहार और संयम का विशेष महत्व है। डॉ. अनूप कुमार गुप्ता की पुस्तक ‘रामायण और महाभारत में सामरिक संस्कृति’ पर भी विचार रखे गए। वहीं डॉ. सुधा दीक्षित ने लोक भूषण पन्नालाल असर की कृतियों और वीरांगना झलकारी बाई के शौर्य पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में काव्य संग्रह ‘कुछ गुनाह तो नहीं किया’ पर भी चर्चा हुई। विभिन्न सत्रों में शोधार्थियों ने लेखकों से संवाद कर जिज्ञासाओं का समाधान किया। इस दौरान प्रो. पुनीत बिसारिया सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कवयित्री सम्मेलन में गूंजी काव्यधारा
मेले के अंतर्गत आयोजित कवयित्री सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. ब्रजलता मिश्रा ने की। उन्होंने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कवयित्री सपना बबेले, प्रगति शंकर सहाय, डॉ. मनीषा गिरी सहित अन्य कवयित्रियों ने भगवान राम एवं राधारानी पर आधारित रचनाओं के साथ-साथ ग़ज़लों और गीतों का प्रभावी पाठ किया। कार्यक्रम का संचालन मोनिका पाण्डेय ‘मनु’ ने किया। सम्मेलन में कई कवयित्रियों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
