झांसी। हिन्दी विभाग में छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु देश – विदेश से बड़े-बड़े साहित्यकारों को आमंत्रित किया जाता है और उनसे व्याख्यान दिलवाये जाते हैं । इसी व्याख्यान माला के अन्तर्गत लंदन में अनेक वर्षों से लेखन कार्य कर रही लेकिन मूलतः भारतीय दिव्या माथुर का आज सोमवार को हिंदी विभाग, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी में व्याख्यान का आयोजन किया गया।

दिव्या माथुर ने छात्रों को बताया – कि यह एक गंभीर समस्या है कि हमारी आज की पीढ़ी अर्थात हमारे युवा विदेश में रहने और आजीविका कमाने के प्रति आकर्षित होते हैं, लेकिन मैं इस बात से आपको अवगत करा दूं, कि भारत से बेहतर कोई भी देश नहीं है । यहां की ज्ञान परंपरा सर्वश्रेष्ठ है, वैज्ञानिक है । आपको भटकने की आवश्यकता नहीं है । आप बहुत सौभाग्यशाली है कि आप भारत के हैं और भारत के लिए कुछ कर रहे है।

छात्र-छात्राओं ने उनसे अनेक प्रश्न पूछे और दिव्या माथुर जी ने छात्रों की जिज्ञासा का समाधान किया । व्याख्यान के दौरान झांसी के बड़े-बड़े साहित्यकार भी मौजूद रहे । जिनमें निहालचंद शिवहरे तथा साकेत सुमन जी प्रमुख है । कार्यक्रम का संचालन डॉ० अचला पांडे ने किया । स्वागत वक्तव्य प्रो० पुनीत बिसारिया जी ने दिया तथा सभी के प्रति आभार डॉ० सुधा दीक्षित ने किया।
व्याख्यान के दौरान डॉ० श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ विपिन प्रसाद, डॉ प्रेमलता, डॉ द्युति मालिनी, अंबर दीक्षित, अर्पिता शुक्ला, पर्वत कुमार, आकाश यादव, सागर इत्यादि अनेक शोधार्थी तथा छात्र – छात्राएं उपस्थित रहे।
