झाँसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा गुजरात राज्य स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं औद्योगिक भ्रमण कार्यक्रम का उत्साहपूर्ण एवं सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्यपाल के निर्देशों तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य रूप से कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार एवं परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनके मार्गदर्शन में यह एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं कैडेट्स को क्षेत्रीय विरासत, धार्मिक इतिहास तथा औद्योगिक कार्यप्रणाली से परिचित कराना था।
कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार की गरिमामयी उपस्थिति ने विद्यार्थियों में विशेष उत्साह का संचार किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण केवल औपचारिक गतिविधि नहीं, बल्कि जीवन को समझने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जब विद्यार्थी कक्षा से बाहर निकलकर वास्तविक परिस्थितियों को देखते हैं, तो उनमें निर्णय लेने की क्षमता, नेतृत्व गुण एवं आत्मविश्वास का विकास होता है। आप सभी इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं, सीखें, प्रश्न पूछें और अपने अनुभवों को अपने व्यक्तित्व निर्माण में शामिल करें। यही अनुभव आपको भविष्य में एक सफल एवं जिम्मेदार नागरिक बनाएंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन बनाए रखते हुए टीम भावना के साथ भ्रमण में सक्रिय भागीदारी करने हेतु प्रेरित किया।
परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर ने अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। ऐसे भ्रमण विद्यार्थियों को व्यवहारिक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। जब आप औद्योगिक इकाइयों, ऐतिहासिक स्थलों एवं सांस्कृतिक धरोहरों को प्रत्यक्ष देखते हैं, तो आपकी समझ और दृष्टि दोनों का विस्तार होता है। मैं आशा करता हूँ कि आप सभी इस अनुभव को अपने जीवन में सकारात्मक रूप से अपनाएंगे और इससे प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने भविष्य निर्माण में करेंगे।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने अपने संदेश एवं शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय सदैव विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल अकादमिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें समाज, संस्कृति एवं औद्योगिक जगत से भी जोड़ते हैं। मैं सभी प्रतिभागियों को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं देता हूँ और आशा करता हूँ कि भविष्य में भी ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।
साथ ही निदेशक, आईक्यूएसी व छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. सुनील कुमार कबिया ने कहा कि यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए समग्र सीख का अवसर है, जिससे उन्हें औद्योगिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाने हेतु प्रेरित करते हुए कार्यक्रम की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सत्येंद्र चौधरी द्वारा किया गया, साथ ही कार्यक्रम सह-समन्वयक प्रो. संजय निबोरिया ने सभी प्रतिभागियों को अनुशासन एवं सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हुए कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता करने के लिए प्रेरित किया। हेमंत चंद्रा एवं हितिका यादव ने व्यवस्थाओं एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंतर्गत भ्रमण दल को कुलसचिव ज्ञानेंद्र कुमार एवं परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों में उत्साह, जिज्ञासा एवं सीखने की प्रबल इच्छा स्पष्ट रूप से दिखाई दी तथा सभी प्रतिभागियों ने अनुशासन एवं टीम भावना के साथ यात्रा का प्रारंभ किया। भ्रमण का प्रारंभ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी के मुख्य द्वार से हुआ, जहाँ से छात्र-छात्राओं का दल निर्धारित क्रम में विभिन्न स्थलों के लिए रवाना हुआ। सबसे पहले दल उनाव (दतिया), मध्य प्रदेश स्थित सूर्य मंदिर पहुँचा, जहाँ विद्यार्थियों ने मंदिर की प्राचीन एवं भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व तथा सूर्य उपासना की परंपराओं को समझा।
उन्होंने स्थानीय लोगों एवं पुजारियों से संवाद कर मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाओं एवं इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की, जिससे उनका अनुभव और अधिक गहन एवं जीवंत बन गया। इसके पश्चात भ्रमण दल झाँसी लौटते हुए सखी के हनुमान मंदिर पहुँचा, जहाँ विद्यार्थियों ने दर्शन कर आध्यात्मिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव किया। यहाँ भी उन्होंने स्थानीय श्रद्धालुओं एवं पुजारियों से बातचीत कर मंदिर की मान्यताओं, इतिहास एवं क्षेत्रीय आस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की, जिसने उन्हें सांस्कृतिक रूप से समृद्ध किया। इसके बाद भ्रमण का अंतिम पड़ाव पराग डेयरी रहा, जहाँ विद्यार्थियों ने दुग्ध प्रसंस्करण, पाश्चुरीकरण, पैकेजिंग एवं विभिन्न दुग्ध उत्पादों के निर्माण की संपूर्ण प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देखा।
उन्होंने डेयरी के अधिकारियों एवं तकनीकी कर्मचारियों से संवाद कर उत्पादन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण एवं वितरण व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की, जिससे उन्हें औद्योगिक कार्यप्रणाली का व्यावहारिक ज्ञान मिला। इस पूरे भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने प्रत्येक स्थल पर स्थानीय लोगों से संवाद कर इतिहास, परंपराओं एवं कार्यप्रणाली को गहराई से समझा और इसे अत्यंत रोचक एवं ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। अंततः सभी प्रतिभागी पुनः विश्वविद्यालय परिसर लौटे, जहाँ कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए इसे अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक बताया। यह भ्रमण न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि इसने विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं औद्योगिक उन्नति को निकट से समझने का अवसर भी प्रदान किया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने अनुशासन, टीम वर्क एवं सामूहिक सहभागिता का उत्कृष्ट परिचय दिया। अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण के महत्व को समझा तथा औद्योगिक एवं धार्मिक स्थलों के बीच सामंजस्य स्थापित करते हुए व्यवहारिक ज्ञान अर्जित किया।
कार्यक्रम में डॉ. राजीव बबेले, डॉ. उपेंद्र तोमर, अनिल बोहरे, डॉ. अतुल खरे, प्रो. अर्चना वर्मा, प्रो. एम.एम. सिंह, डॉ. विनोद कुमार, चंद्रभान प्रजापति, शशांक चन्द्रा सहित अन्य सम्मानित प्राध्यापक एवं छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
